Madhepura News: देश को आजाद हुए आठ दशक बीतने को हैं, लेकिन समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी गरीब महिलाओं के लिए इस आजादी के क्या वास्तविक मायने हैं? एक तरफ जहां सरकारी मंचों से महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों की महिलाएं आज भी महंगाई, सामाजिक बंदिशों और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के कर्ज के चक्रव्यूह में पिसने को मजबूर हैं. बिहार के मधेपुरा जिले स्थित कुमारखंड अस्पताल परिसर में जब विभिन्न गांवों की दर्जनों महिलाएं एकजुट हुईं, तो उनकी आंखों में दर्द के साथ-साथ अपने अधिकारों के लिए लड़ने का जज्बा भी साफ नजर आया. अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) के दूसरे प्रखंड सम्मेलन में महिला अधिकारों और उनके सामने खड़ी चुनौतियों पर खुलकर विमर्श हुआ.
'पिता, पति और बेटे की आज्ञा तक सीमित महिला जीवन'
सम्मेलन को संबोधित करते हुए एडवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामपरी ने देश में महिलाओं की वर्तमान स्थिति पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि कहने को हम आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, लेकिन आज भी महिला को जीवन के हर मोड़ पर किसी न किसी की मर्जी का मोहताज होना पड़ता है. बचपन में पिता, शादी के बाद पति और वृद्धावस्था में बेटे की आज्ञा का पालन करने का सामाजिक दबाव महिलाओं को स्वतंत्र नागरिक बनने से रोकता है. उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई की सबसे सीधी और मारक चोट गरीब परिवारों की महिलाओं पर पड़ रही है, जिनका रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है.
माइक्रोफाइनेंस का जाल और प्रेम विवाह पर बढ़ती हिंसा
रामपरी ने सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज गांव-गांव में फैली माइक्रोफाइनेंस कंपनियां गरीब महिलाओं का आर्थिक शोषण कर रही हैं. रोजगार के नाम पर बांटे जा रहे भारी ब्याज वाले कर्ज के बोझ तले गरीब महिलाएं दबती जा रही हैं. उन्होंने मांग उठाई कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिना ब्याज के रोजगार ऋण दिया जाए. इसके साथ ही उन्होंने समाज में बढ़ते दुष्कर्म, हत्या, साइबर क्राइम और प्रेम विवाह को लेकर होने वाली हिंसक घटनाओं पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि बालिग लड़का-लड़की की पसंद को अपराध मानकर उनके साथ हिंसा करना एक सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
भूमिहीन महिलाओं के लिए बासगीत पर्चे और आवास की मांग
एडवा ने सम्मेलन के माध्यम से प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर महिलाओं के बुनियादी अधिकारों की आवाज उठाई. संगठन ने मांग की कि इलाके की भूमिहीन महिलाओं के नाम से अविलंब बासगीत पर्चा निर्गत किया जाए और सीलिंग की जमीनों पर उन्हें पक्का आवास या जमीन मुहैया कराई जाए. सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेता अशोक कुमार, पन्ना लाल यादव, अनमोल यादव, कामरेड ललन यादव, जगत नारायण झा, राजकिशोर सरदार और रंजू देवी सहित अन्य वक्ताओं ने भी महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक न्याय की लड़ाई को और तेज करने का संकल्प दोहराया.
Madhepura News: 13 सदस्यीय नई प्रखंड कमेटी का गठन
जयमाला देवी की अध्यक्षता में संपन्न इस साधारण सभा में कुमारखंड प्रखंड के जदुआपट्टी, भतनी, मकड़ी, रौता और कुमारखंड गांवों से आई करीब 50 महिला सदस्यों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम के अंत में संगठन के विस्तार और भावी आंदोलनों को गति देने के उद्देश्य से 13 सदस्यीय नई प्रखंड कमेटी का लोकतांत्रिक तरीके से गठन किया गया. इसमें सर्वसम्मति से बिजली खातून को अध्यक्ष, जयमाला देवी को सचिव तथा रंजू देवी को कोषाध्यक्ष चुना गया. वहीं बिंदुला देवी को संयुक्त सचिव तथा फूलो देवी व उमा भारती को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई.
