मधेपुरा. खरीफ मौसम में किसानों को सब्जियों की वैज्ञानिक एवं उन्नत खेती के प्रति जागरूक करने और उनकी उत्पादन क्षमता व आय बढ़ाने के उद्देश्य से जिले में खरीफ किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है. इसी क्रम में सदर प्रखंड की तुलसीबाड़ी पंचायत समेत जिले के विभिन्न प्रखंडों की पंचायतों में "खरीफ मौसम में सब्जी की खेती" विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गये. कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक और बेहतर उत्पादन के तौर-तरीकों की जानकारी दी गयी.
तुलसीबाड़ी पंचायत में किसान गोष्ठी का हुआ आयोजन
तुलसीबाड़ी पंचायत में आयोजित किसान गोष्ठी का विधिवत उद्घाटन प्रखंड तकनीकी प्रबंधक एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम के दौरान किसानों को खरीफ मौसम में सब्जी उत्पादन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी गयी और उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया.
उन्नत फसलों के उत्पादन और बाजार की दी जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने तकनीकी सत्र में खरीफ मौसम में उगायी जाने वाली उन्नत एवं व्यावसायिक फसलों के उत्पादन और उत्पादकता से संबंधित जानकारी दी. किसानों को फसलों के भंडारण और बाजार से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में भी बताया गया, ताकि उत्पादन के साथ बेहतर बाजार प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा सके.
रोग प्रबंधन और आधुनिक तकनीक पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ फसलों में लगने वाले विभिन्न रोगों और उनके प्रभावी उपचार एवं प्रबंधन की जानकारी भी किसानों को दी गयी. वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल उत्पादन के दौरान वैज्ञानिक तरीके अपनाने और समय पर रोगों की पहचान कर उचित प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया.
हर पंचायत में 75 से 100 किसानों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य
जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक आत्मा रितेश रंजन ने बताया कि किसानों तक आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीक पहुंचाने के उद्देश्य से जिले के सभी प्रखंडों में प्रखंडवार, तिथिवार और पंचायतवार खरीफ किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जायेगा. प्रत्येक पंचायत में करीब 75 से 100 किसानों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
सब्जी उत्पादन को लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास
जिला प्रशासन और कृषि विभाग का प्रयास है कि किसानों को खेत तक आधुनिक कृषि ज्ञान उपलब्ध कराया जाए. इसके माध्यम से खरीफ मौसम में सब्जी उत्पादन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया जा रहा है. वैज्ञानिक खेती की जानकारी मिलने से किसानों को उत्पादन बढ़ाने, लागत प्रबंधन और बाजार की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
