वर्षों बाद 'जश्न-ए-उर्दू' के पुनर्जीवन का स्वागत करते हुए उर्दू परामर्शदातृ समिति के सदस्य प्रो. डॉ. फिरोज मंसूरी ने मधेपुरा में एक परिचर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि उर्दू के संवर्धन के नाम पर केवल मुशायरे और भाषणबाजी पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि बिहार में उर्दू को द्वितीय राजभाषा का संवैधानिक दर्जा प्राप्त है और इसके लिए उर्दू निदेशालय, उर्दू अकादमी व अनुवादक संवर्ग जैसी मजबूत संस्थागत व्यवस्थाएं मौजूद हैं. अब समय आ गया है कि इन व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ धरातल पर छात्रों, शिक्षकों और आम नागरिकों तक किस हद तक पहुंच रहा है, इसका निष्पक्ष व सार्वजनिक मूल्यांकन किया जाए.
नीतीश कार्यकाल में विकसित हुआ संस्थागत ढांचा
डॉ. फिरोज मंसूरी ने बिहार में उर्दू के विकास को लेकर पूर्व में उठाए गए कदमों का उल्लेख किया:
- द्वितीय राजभाषा नियमावली: वर्ष 2013 में द्वितीय राजभाषा नियमावली का निर्माण हुआ और 27 हजार उर्दू शिक्षकों की बहाली की ऐतिहासिक घोषणा की गई.
- अनुवादक संवर्ग का विस्तार: अनुवादक संवर्ग को सुदृढ़ करते हुए 2025 में 715 सहायक उर्दू अनुवादकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जिसके बाद 126 अन्य पदों पर नियुक्ति हुई और करीब 2600 पदों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.
- संस्थागत आधार: यद्यपि सभी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, लेकिन राज्य में एक मजबूत संस्थागत ढांचा जरूर तैयार हुआ.
वर्तमान परिदृश्य में नई चुनौतियां और विधिक अड़चनें
वर्तमान समय में उर्दू शिक्षा व्यवस्था के समक्ष कई नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं:
- सरप्लस शिक्षक और तबादला विवाद: उर्दू शिक्षकों को सरप्लस घोषित करने और स्थानांतरण नीति को लेकर विसंगतियों की शिकायतें आईं. अल्पसंख्यक आयोग द्वारा भौतिक सत्यापन की मांग के बाद 17 अगस्त 2026 को पटना हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई है.
- मदरसा और उच्च शिक्षा: डिग्री कॉलेजों में उर्दू प्राध्यापकों के रिक्त पदों और मदरसों की जांच के कारण पठन-पाठन तथा शिक्षकों के वेतन पर असर नहीं पड़ने की बात कही गई.
- सकारात्मक पहल का स्वागत: उन्होंने वर्तमान सरकार द्वारा 2000 नए अनुवादकों की प्रस्तावित नियुक्ति और 'जश्न-ए-उर्दू' को दोबारा शुरू करने के फैसले का स्वागत किया.
'बिहार उर्दू विकास रिपोर्ट' और आधुनिक तकनीक की मांग
डॉ. मंसूरी ने सरकार के समक्ष उर्दू के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव रखे:
- वार्षिक विकास रिपोर्ट: हर जश्न-ए-उर्दू के अवसर पर सरकार आधिकारिक 'बिहार उर्दू विकास रिपोर्ट' जारी करे. इसमें शिक्षकों की संख्या, अनुवादकों की तैनाती, विश्वविद्यालयों में स्वीकृत पद, अकादमी की योजनाओं और डिजिटल सामग्री का स्पष्ट ब्योरा दर्ज हो.
- AI और डिजिटलाइजेशन: उन्होंने उर्दू भाषा को आधुनिक युग के अनुरूप AI आधारित OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन), स्पीच-टू-टेक्स्ट और समृद्ध डिजिटल लाइब्रेरी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया.
