मधेपुरा में दो घंटे की बारिश से डूबा मुख्य बाजार: सड़कों पर लगा घुटनों तक पानी

मधेपुरा में दो घंटे की बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया. मुख्य सड़कें घुटनों तक पानी में डूब गईं, जिससे आमजन, फुटपाथ विक्रेताओं और दुकानदारों को भारी परेशानी हुई. कई दुकानों में भी पानी घुस गया, जिससे लाखों का नुकसान हुआ.

बारिश के बाद बाजार की प्रमुख सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, जिससे आमजन, फुटपाथ विक्रेताओं और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस भारी जलजमाव के कारण बाजार की रौनक पूरी तरह फीकी पड़ गई और कई दुकानदारों को अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान अस्थायी रूप से बंद करने पर मजबूर होना पड़ा.

उमस से राहत जल्द ही आफत में बदली, दुकानों में घुसा पानी

पिछले कई दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों ने बारिश शुरू होते ही राहत की सांस ली थी, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी. देखते ही देखते मुख्य बाजार, स्टेशन रोड, कर्पूरी चौक और आसपास के रिहायशी इलाकों में तेजी से पानी जमा होने लगा. कई जगहों पर पानी घुटनों से ऊपर तक पहुंच गया, जिससे पैदल राहगीरों का चलना भी दूभर हो गया. स्थिति इतनी बदतर हो गई कि कई स्थायी दुकानों के भीतर नाले का गंदा पानी प्रवेश कर गया, जिससे कपड़े, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और किराना सामग्री भीगकर खराब हो गई.

फुटपाथ दुकानदारों की डूबी कमाई, मची अफरा-तफरी

इस जलजमाव का सबसे तगड़ा झटका फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले छोटे कारोबारियों को लगा है. अचानक जलस्तर बढ़ने से सब्जी, फल और कपड़े बेचने वाले छोटे दुकानदारों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर हटाने का मौका तक नहीं मिला. पीड़ितों का कहना है कि दिनभर की मेहनत की कमाई तो पानी में बह ही गई, साथ ही पूंजी भी डूब गई. स्थानीय दुकानदारों ने भारी नाराजगी जताते हुए कहा कि वे नियमित रूप से टैक्स का भुगतान करते हैं, लेकिन नगर परिषद द्वारा नालियों की समय पर सफाई न कराए जाने का खामियाजा हर साल उन्हें भुगतना पड़ता है.

चरमराई जलनिकासी व्यवस्था से बढ़ा बीमारियों का खतरा

जलजमाव के घंटों बाद भी शहर से पानी का निकास नहीं हो सका, जिससे प्रशासनिक लापरवाही साफ उजागर हुई. मुख्य बाजार की अधिकांश नालियां कचरे और सिल्ट से पूरी तरह पटी होने के कारण ब्लॉक हो गईं, जिससे पानी सड़कों पर ही ठहर गया. सड़कों पर लबालब पानी भरे होने के कारण वाहन चलाना अत्यंत जोखिम भरा हो गया और कई बाइक सवार गिरते-गिरते बचे. इस गंदे पानी के ठहराव से अब इलाके में मच्छरों के पनपने और डेंगू, मलेरिया जैसी जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है, जिसे लेकर नागरिकों ने प्रशासन से अविलंब फॉगिंग कराने की मांग की है.

हर साल मानसून से पहले नालों की मुकम्मल सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत हमेशा इसके उलट होती है. शहर के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त व्यावसायिक केंद्र का यह हाल नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. जब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक व्यापारियों का आर्थिक नुकसान और जनता की फजीहत ऐसे ही होती रहेगी


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