मधेपुरा: 'दीया तले अंधेरा', ADM और सिविल सर्जन के सरकारी आवास परिसर में पसरी गंदगी, उगी झाड़ियों ने खोली सफाई दावों की पोल

मधेपुरा शहर में प्रशासनिक अधिकारियों के सरकारी आवासों की बदहाल तस्वीरें नगर परिषद के स्वच्छता दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं. घनी झाड़ियों, काई और गंदगी से भरे परिसर में गंदगी का साम्राज्य साफ नजर आ रहा है.

मधेपुरा शहर में प्रशासनिक अधिकारियों के लिए बने आवासीय परिसर की बदहाली इन दिनों नगर परिषद और संबंधित विभागों के स्वच्छता दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. शहर के ब्लॉक सी और डी स्थित सरकारी आवासीय भवनों की सामने आई तस्वीरों में जगह-जगह फैली घनी झाड़ियां, दीवारों पर जमी काई, उखड़ी हुई पेंट और अनियंत्रित रूप से फैली पेड़-पौधों की शाखाएं साफ नजर आ रही हैं. इस परिसर में अपर समाहर्ता (ADM), सिविल सर्जन और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सहित कई वरीय प्रशासनिक अधिकारी निवास करते हैं. ऐसे में जब जिले के नीति-नियंताओं के अपने आवास की यह दुर्दशा है, तो आम मोहल्लों की सफाई व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.

दीवारों पर काई और खिड़कियों पर उगे पौधे

आवासीय भवनों की बाहरी दीवारों पर काई और गंदगी की मोटी परत जम चुकी है.

खिड़कियों के छज्जों, कोनों और ड्रेनेज पाइपों के आसपास जंगली वनस्पतियां उग आई हैं. कई जगहों पर पेड़ों की शाखाएं बढ़कर सीधे दीवारों और छज्जों तक पहुंच गई हैं. स्थिति देखकर यह स्पष्ट होता है कि लंबे समय से इस परिसर में न तो झाड़ियों की कटाई हुई है, न पेड़ों की छंटाई और न ही भवनों की बाहरी रंगाई-पुताई या मरम्मत कराई गई है.

सरकारी आवास में लगी झरिया | Prabhat Khabar Network

स्वास्थ्य और भवन की संरचना दोनों पर खतरा

परिसर की यह स्थिति केवल देखने में ही खराब नहीं है, बल्कि सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है:

  • भवन को नुकसान: दीवारों और पाइपों के आसपास लगातार नमी बने रहने से सरकारी भवनों की संरचना कमजोर हो रही है.
  • बीमारियों की आशंका: घनी झाड़ियों और जमा कचरे के कारण मच्छरों, जहरीले कीड़े-मकोड़ों और सांप-बिच्छू के पनपने का खतरा बढ़ गया है.
  • जल निकासी बाधित: बरसात के मौसम में छज्जों और नालियों के पास उगी वनस्पतियां पानी के बहाव को रोक रही हैं, जिससे परिसर में जलजमाव की स्थिति बन जाती है.

पहले भी उठते रहे हैं सफाई व्यवस्था पर सवाल

मधेपुरा में साफ-सफाई की लचर व्यवस्था का मुद्दा नया नहीं है:

  • टेंडर विवाद: वर्ष 2025 में नगर परिषद क्षेत्र में सफाई के नए टेंडर में अनावश्यक देरी के कारण पूरे शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई थी.
  • डीएम की समीक्षा: मई 2026 में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित नगर निकायों की समीक्षा बैठक में भी साफ-सफाई, जल निकासी, पेयजल और स्ट्रीट लाइट के कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए गए थे, लेकिन धरातल पर असर सीमित ही दिखा.
सरकारी आवास में लगी झरिया | Prabhat Khabar Network

नियमित रखरखाव और जवाबदेही तय करने की मांग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी कार्यालय और अधिकारियों के आवास किसी भी जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली का आईना होते हैं. केवल मुख्य सड़कों पर झाड़ू लगाने से शहर स्वच्छ नहीं बन सकता. गलियों, नालों, कार्यालयों और आवासीय कॉलोनियों की भी नियमित सफाई होनी चाहिए.

लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल ब्लॉक सी और डी के आवासों का निरीक्षण करे, झाड़ियों की कटाई-छंटाई कराए और भवनों की आवश्यक मरम्मत कराकर नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी तय करे.


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By Aman Kumar

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