सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक पर उठे सवाल, इंटक जिलाध्यक्ष ने सरकार की मंशा पर जताया संदेह

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ दिन पूर्व अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इसकी घोषणा की थी.

डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक सिर्फ घोषणा, लागू करना मुश्किल : इंटक

– सरकार की नई स्वास्थ्य नीति पर उठे सवाल, इंटक ने जताई विफलता की आशंका

उदाकिशुनगंज

राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के जिलाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने बिहार सरकार द्वारा सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह दिशाहीन हो चुकी है और यह योजना व्यवहारिक रूप से सफल नहीं हो पायेगी.

गौरतलब है कि बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में एक संकल्प जारी करते हुए सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने का निर्णय लिया है. इसके बदले डॉक्टरों को विशेष भत्ता देने की व्यवस्था की गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुछ दिन पूर्व अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इसकी घोषणा की थी. संजय कुमार सिंह ने कहा कि यह योजना सुनने में भले ही आकर्षक लगे, लेकिन इसके ईमानदारी से लागू होने की संभावना बेहद कम है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस से पूरी तरह रोक सके. उन्होंने कहा कि आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार के लिए यह योजना अनुत्पादक साबित होगी. उनके अनुसार, डॉक्टर सरकार से नॉन-प्रैक्टिसिंग भत्ता भी लेंगे और चोरी-छिपे प्रैक्टिस भी जारी रखेंगे, जैसा कि पहले भी होता रहा है. इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1978 में कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री लालमुनि चौबे ने प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने की कोशिश की थी, लेकिन डॉक्टरों के विरोध के कारण यह लागू नहीं हो सका. इसके बाद वर्ष 1990 में लालू प्रसाद यादव की सरकार ने भी इस दिशा में प्रयास किया, लेकिन भारी विरोध के चलते कदम पीछे खींचने पड़े. वर्ष 2006 में नीतीश कुमार की सरकार ने एक बार फिर प्राइवेट प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाया और डॉक्टरों को नॉन-प्रैक्टिसिंग भत्ता दिया गया, लेकिन इसका भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिला. बाद में इसे शिथिल करते हुए ड्यूटी के बाद प्रैक्टिस की अनुमति दे दी गई. संजय कुमार सिंह ने कहा कि पटना स्थित आईजीआईएमएस में प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह प्रतिबंध है, इसके बावजूद अधिकांश डॉक्टर चोरी-छिपे प्रैक्टिस करते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस बात की जानकारी सरकार को भी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती. उन्होंने कहा कि सरकार में इच्छाशक्ति की कमी है. जो सरकार डॉक्टरों से उनकी ड्यूटी सही ढंग से नहीं करवा पा रही है, वह प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने की घोषणा कर रही है, जो हास्यास्पद प्रतीत होता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की इस पहल को एक प्रयास के रूप में देखा जा सकता है और इसके लिए शुभकामनाएं दी जानी चाहिये.

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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