मधेपुरा के जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने जिले में उपलब्ध सरकारी भूमि के संरक्षण और इसके प्रभावी जनोपयोगी उपयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. डीएम ने सिंहेश्वर प्रखंड की रूपौली पंचायत सहित ओल्ड पुलिस लाइन, वन विभाग और मधेपुरा प्रखंड अंतर्गत विभिन्न सरकारी जमीनों का स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से भूमि की कुल उपलब्धता, सीमांकन और राजस्व अभिलेखों की विस्तृत जानकारी ली तथा सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए.
अभिलेखों के अनुसार सत्यापन और सीमांकन के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी सरकारी जमीनों का राजस्व अभिलेखों (कागजातों) के अनुरूप शत-प्रतिशत सत्यापन और भौतिक सीमांकन कराया जाए.
उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि संपूर्ण समाज की सार्वजनिक संपत्ति है और इसका संरक्षण करना प्रशासनिक महकमे की सर्वोच्च प्राथमिकता है. किसी भी सरकारी प्लॉट पर अवैध कब्जे या अतिक्रमण को रोकने के लिए नियमित अंतराल पर स्थलीय निगरानी सुनिश्चित की जाए.
जनहित और आवश्यकता के अनुसार होगा उपयोग
डीएम अभिषेक रंजन ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध सरकारी भूमि को बेकार नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि इसका उपयोग स्थानीय जनहित और विकास योजनाओं में किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि जिस इलाके में जिस प्रकार की सार्वजनिक सुविधा या सरकारी भवन की आवश्यकता होगी, उसी के अनुरूप जमीन चिन्हित कर उसका आवंटन किया जाएगा ताकि आम जनता को अधिकतम लाभ मिल सके.
विसंगति मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई, विभागों में बेहतर समन्वय जरूरी
जिलाधिकारी ने संबंधित अंचल और राजस्व अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि जमीन के अभिलेखों और जमीनी स्थिति में किसी भी तरह की विसंगति या गड़बड़ी पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने भूमि संरक्षण के कार्य को त्रुटिहीन बनाने के लिए अंचल प्रशासन, वन विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के बीच आपसी तालमेल व समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया. निरीक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के वरीय प्रशासनिक और तकनीकी पदाधिकारी उपस्थित रहे.
