बाढ़ की विकराल स्थिति को देखते हुए बिहार को राष्ट्रीय आपदा में शामिल किया जाए : डॉ. अजय

बिहार में बाढ़ की विकराल स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग जोर पकड़ रही है. 34 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं और किसानों की धान की फसलें डूबने से भारी नुकसान हुआ है. केंद्र सरकार से विशेष राहत सहायता की अपील की गई है.

Bihar Flood News: बिहार में बाढ़ की विकराल होती स्थिति के बीच अब इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग उठने लगी है. विधान परिषद सदस्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिहार के लिए विशेष राहत सहायता उपलब्ध कराने और बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि राज्य में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है और बड़ी आबादी इसकी चपेट में आ गयी है.

डॉ. अजय कुमार सिंह ने अपने पत्र में बाढ़ की मौजूदा स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ का प्रभाव राज्य के 13 जिलों के 79 प्रखंडों तक फैल गया है. आपदा प्रबंधन विभाग की 8 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से 480 पंचायतों के करीब 34.31 लाख लोग प्रभावित हैं. इतनी बड़ी आबादी के प्रभावित होने से राहत और बचाव कार्यों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है.

34 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में

बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है. कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित रखने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की ओर से सामुदायिक रसोई और राहत शिविर चलाए जा रहे हैं. प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही के लिए नावों की भी व्यवस्था की गयी है.

डॉ. सिंह का कहना है कि प्रशासन की ओर से राहत और बचाव के लिए किए जा रहे प्रयास जरूरी हैं, लेकिन बाढ़ का दायरा और प्रभावित लोगों की संख्या इतनी अधिक है कि मौजूदा व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है. ऐसे में केंद्र सरकार से विशेष सहायता मिलना जरूरी है.

धान की फसल डूबने से किसानों को भारी नुकसान

बाढ़ का असर केवल लोगों के घर और आवागमन तक सीमित नहीं है. बड़ी मात्रा में कृषि भूमि भी बाढ़ के पानी में डूब गयी है. लाखों हेक्टेयर में लगी धान की फसल प्रभावित होने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है. खेती पर निर्भर ग्रामीण परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराने की आशंका है.

डॉ. अजय कुमार सिंह ने बाढ़ से हुई फसल क्षति का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है. उनका कहना है कि फसल के नुकसान का आकलन कर किसानों को राहत उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल सके.

बिहार सरकार के लिए अकेले संकट से निपटना मुश्किल

विधान परिषद सदस्य ने अपने पत्र में कहा है कि बिहार सरकार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रही है. ऐसे में इतने बड़े स्तर पर आयी बाढ़ से अकेले निपटना राज्य सरकार के लिए मुश्किल है. प्रभावित लोगों को राहत देने, कृषि नुकसान की भरपाई करने और बाढ़ के बाद की स्थिति से निपटने के लिए बड़े स्तर पर संसाधनों की जरूरत होगी.

उन्होंने केंद्र सरकार से इस संकट में हस्तक्षेप करने की मांग की है. उनका कहना है कि बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए बिहार को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाना चाहिए और राज्य को विशेष राहत सहायता उपलब्ध करायी जानी चाहिए.

Bihar Flood News: राहत के साथ फसल क्षति का सर्वे जरूरी

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के साथ अब कृषि नुकसान का आकलन भी महत्वपूर्ण हो गया है. धान की फसल के डूबने से किसानों की मेहनत और आय दोनों प्रभावित हुई हैं. ऐसे में फसल क्षति का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की गयी है.

डॉ. सिंह ने केंद्र सरकार से विशेष राहत सहायता देने की मांग करते हुए कहा है कि बाढ़ की मौजूदा स्थिति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. राज्य के कई जिलों और प्रखंडों में बड़ी आबादी के प्रभावित होने के कारण राहत कार्यों के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है.

फिलहाल बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर राहत और बचाव के प्रयास जारी हैं. वहीं, राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और विशेष केंद्रीय सहायता देने की मांग के बीच अब केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली मदद पर नजर रहेगी.

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लेखक के बारे में

By कौनैन वशीर

कौनैन वशीर प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. वर्ष 2001 में अमर उजाला से पत्रकारिता की शुरुआत की. अभी उदाकिशनगंज (मधेपुरा) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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