Madhepura News: घैलाढ़ प्रखंड के भान टेकती गांव में बुधवार को आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला. श्री श्री 108 नर्मदेश्वर महादेव शिव मंदिर में शिवलिंग प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ 208 कन्याओं की भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ. वैदिक मंत्रोच्चार, हर-हर महादेव के जयघोष और श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया.
208 कन्याओं ने भीरखी नदी से भरा पवित्र जल
प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव की शुरुआत नवनिर्मित मंदिर परिसर से निकली भव्य कलश शोभायात्रा से हुई. 208 कन्याएं सिर पर कलश लेकर मधेपुरा स्थित भीरखी नदी पहुंचीं, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से कलश में पवित्र जल भरा गया.
इसके बाद श्रद्धालु गांव का भ्रमण करते हुए कलश लेकर वापस मंदिर परिसर पहुंचे. यात्रा के दौरान "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष से पूरा इलाका शिवमय हो गया.
तीन दिनों तक चलेंगे धार्मिक अनुष्ठान
आयोजन समिति के सदस्य अश्विनी झा ने बताया कि बुधवार को कलश यात्रा के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ है.
गुरुवार को विशेष वैदिक पूजन, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे. वहीं शुक्रवार को भव्य शोभायात्रा के बाद विधि-विधान के साथ नर्मदेश्वर महादेव शिवलिंग की प्राणप्रतिष्ठा की जाएगी.
आयोजन में दूर-दराज के श्रद्धालुओं के भी शामिल होने की संभावना है.
ग्रामीणों के सहयोग से बना भव्य शिव मंदिर
आयोजन समिति के अनुसार भान टेकती वार्ड संख्या-4 में इस भव्य शिव मंदिर का निर्माण ग्रामीण फेकन मंडल ने अपने पुत्र राहुल कुमार, अंजनी कुमार, अंगद कुमार और रणधीर कुमार के सहयोग से कराया है.
मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद अब प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल है. ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से आयोजन की तैयारियों में भागीदारी निभाई है.
Madhepura News: पूरे गांव में दिखा आस्था और उत्साह का माहौल
कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भाग लिया. श्रद्धालुओं ने पूरे रास्ते भगवान शिव के जयकारे लगाए, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा.
इस अवसर पर सोहन पोद्दार, प्रकाश कुमार, राजेश कुमार, श्यामसुंदर मंडल, अश्विनी झा, जगदीश मंडल समेत सैकड़ों ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे.
धार्मिक आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है. श्रद्धालुओं का मानना है कि शिवलिंग प्राणप्रतिष्ठा के बाद यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा.
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