Madhepura News: मधेपुरा जिले में एनीमिया यानी खून की कमी से बचाव और नियंत्रण को लेकर प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया है. स्क्रीनिंग से लेकर आयरन-फोलिक एसिड की उपलब्धता, वितरण, उपचार और मरीजों के फॉलोअप तक हर स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने को कहा गया है.
जिला पदाधिकारी अभिषेक रंजन की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित एनीमिया मुक्त भारत अभियान की विस्तृत समीक्षा की गयी. बैठक में जिले में अभियान के तहत चल रहे काम, निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले प्रगति और विभिन्न स्वास्थ्य मानकों की उपलब्धि की समीक्षा हुई.
बैठक में साफ संदेश दिया गया कि अभियान का उद्देश्य केवल आंकड़े पूरा करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक वास्तविक स्वास्थ्य और पोषण संबंधी सुविधाएं पहुंचाना है.
एनीमिया की पहचान से इलाज तक हर चरण पर नजर
एनीमिया की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जिले में चल रही गतिविधियों की समीक्षा के दौरान डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रभावी क्रियान्वयन का निर्देश दिया.
उन्होंने स्क्रीनिंग को मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि एनीमिया से प्रभावित लोगों की समय पर पहचान हो सके. इसके साथ ही आयरन-फोलिक एसिड की उपलब्धता और वितरण, उपचार तथा मरीजों के फॉलोअप की व्यवस्था को भी प्रभावी बनाने का निर्देश दिया गया.
स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाये जा रहे जन-जागरूकता कार्यक्रमों को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया.
सिर्फ दवा बांटना नहीं, फॉलोअप भी जरूरी
एनीमिया से निपटने के लिए केवल स्क्रीनिंग या आयरन-फोलिक एसिड उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है. जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर उपचार मिले और उपचार के बाद उसकी स्थिति की निगरानी भी हो, यह सुनिश्चित करना जरूरी है.
इसी वजह से डीएम ने स्क्रीनिंग, उपचार और फॉलोअप से जुड़े सभी निर्धारित लक्ष्यों को शत-प्रतिशत पूरा करने पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण संबंधी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है. इसके लिए सभी संबंधित पदाधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी आपसी समन्वय के साथ काम करें.
1 सितंबर से शुरू होगा NCD कैंपेन
बैठक में सिर्फ एनीमिया मुक्त भारत अभियान की समीक्षा नहीं हुई. आगामी 1 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले एनसीडी कैंपेन की तैयारियों की भी समीक्षा की गयी.
एनसीडी यानी गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान और उपचार को लेकर यह अभियान महत्वपूर्ण है. इसके तहत लोगों की स्क्रीनिंग, संभावित मरीजों की पहचान, जरूरी जांच, उपचार और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था पर जोर दिया जायेगा.
डीएम ने अभियान की तैयारियों को लेकर अधिकारियों से लक्ष्य आधारित कार्ययोजना के अनुसार काम करने को कहा.
कैंपेन में अधिक से अधिक लोगों की होगी स्क्रीनिंग
एनसीडी कैंपेन के दौरान अधिक से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया गया है. संभावित मरीजों की पहचान के बाद उनकी आवश्यक जांच और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.
सिर्फ मरीज की पहचान कर लेना पर्याप्त नहीं होगा. चिन्हित मरीजों का नियमित फॉलोअप भी किया जायेगा, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनी रहे और जरूरत के अनुसार आगे का उपचार उपलब्ध कराया जा सके.
डीएम ने अभियान से जुड़े सभी पदाधिकारियों और कर्मियों को निर्धारित लक्ष्य के अनुसार समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण काम करने का निर्देश दिया.
शत-प्रतिशत उपलब्धि के लिए विभागों में समन्वय पर जोर
एनीमिया मुक्त भारत अभियान और आगामी एनसीडी कैंपेन दोनों में स्वास्थ्यकर्मियों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना गया.
डीएम ने कहा कि प्रत्येक स्तर पर शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारी और कर्मी अपनी जिम्मेदारी के अनुसार समय पर काम करें. अभियान के दौरान किसी स्तर पर कमी रहने से जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचने में बाधा आ सकती है.
इसलिए स्क्रीनिंग से लेकर उपचार और फॉलोअप तक पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया गया.
Madhepura News: आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
एनीमिया और गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान होने से लोगों को बीमारी के गंभीर होने से पहले जरूरी उपचार मिल सकता है. स्क्रीनिंग के माध्यम से ऐसे लोगों की पहचान की जा सकती है जिन्हें स्वयं अपनी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी नहीं होती.
इसी तरह एनसीडी कैंपेन के माध्यम से संभावित मरीजों की पहचान, जांच और उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जायेगा.
प्रशासन की समीक्षा बैठक में तय लक्ष्य अब जमीन पर किस तरह लागू होते हैं, इसका असर आने वाले दिनों में स्वास्थ्य केंद्रों और कैंपेन की गतिविधियों में दिखाई देगा.
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के संबंधित पदाधिकारी, चिकित्सा पदाधिकारी और अन्य संबंधित कर्मी मौजूद थे.
