डॉक्टर की लापरवाही से अधेड़ की मौत, तोड़-फोड़

आरोप . मुरलीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में घटी घटना मुरलीगंज : जिले के स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है. मुरलीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार की रात को चिकित्सक की लापरवाही के कारण एक अधेड़ की मौत हो गयी. इससे परिजनों ने चिकित्सक के […]

आरोप . मुरलीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में घटी घटना

मुरलीगंज : जिले के स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है. मुरलीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार की रात को चिकित्सक की लापरवाही के कारण एक अधेड़ की मौत हो गयी. इससे परिजनों ने चिकित्सक के खिलाफ हंगामा शुरू कर दिया और अस्पताल में जमकर तोड़-फोड़ की. स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल के चिकित्सक व कर्मी भाग खड़े हुए. मौके पर मुरलीगंज पुलिस पहुंच कर स्थिति को काबू कर परिजनों को समझा बुझा कर घर भेजा.
मुरलीगंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या-14 निवासी लगभग 55 वर्षीय मो नीरो अचानक बीमार पड़ गये. बेहोशी की हालत में मुरलीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उन्हें लाया गया. रात के करीब नौ बजे अस्पताल पहुंचाने पर कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था. लगभग एक घंटे के बाद डॉ डीपी रमन आये और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मधेपुरा रेफर कर दिया. चिकित्सक की देरी से आने पर आक्रोशित परिजनों ने हंगामा शुरू कर अस्पताल में तोड़-फोड़ करने लगे. तभी मौका देख चकित्सक व उनके कर्मी भाग खड़े हुए. घटना की सूचना पर मुरलीगंज पुलिस मौके पर पहुंच कर हंगामा को शांत कराया.
मरीज की बात ठीक से समझने को तैयार नहीं डॉक्टर: मुरलीगंज पीएचसी की व्यवस्था के बारे में प्रखंड प्रमुख मनोज कुमार साह ने कहा कर्मचारियों की लापरवाही इतनी बढ़ गयी है कि मरीजों से ठीक तरह से बात भी नहीं करते है. अगर आज समय पर डॉक्टर मौजूद रहते और कर्मी सही तरीके से उपचार करते तो शायद मो नीरो की जा बचायी जा सकती थी. पीएचसी के विषय में क्या कहना यहां कभी मेनू के अनुसार भोजन दिया जाता है. अस्पताल में शुद्ध पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है. प्रखंड शिक्षा समिति के अध्यक्ष सह पंचायत समिति सदस्य प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सक मनमानी करते रहते है.
अस्पताल की ड्यूटी छोर अपने निजी क्लीनिक के संचालन में मस्त रहते है. अस्पताल के व्यवस्थापन में काफी अनियमितता बरती जाती है. इन सभी की जांच कर दोषी पर कार्रवाई होनी चाहिए. मुखिया प्रतिनिधि सिंगियान बबलू कुमार दास ने भी अस्पताल के व्यवस्थापन और कर्मचारियों की लापरवाही पर कहा कि जिला के वरीय पदाधिकारी के द्वारा समय समय पर जांच कर विधि व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त किया जाय ताकि गरीबों का समुचित इलाज हो सके. मनोज कुमार समिति सदस्य हरिपुरकलां कहते है जब भी अस्पताल आता हूं कभी भी विधि व्यवस्थस ठीक नहीं पायी जाती है. युवा क्लब के संयोजक रविकांत कुमार ने कहा कि धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सक के द्वारा इस तरह की लापरवाही करना अशोभनीय है.
अस्पताल के कर्मचारी भी मरीजों से अच्छा व्यवहार नहीं करते है. डा डीपी रमन हमेशा ही अपनी ड्यूटी के प्रति संवेदनशील नहीं रहते है. अस्पताल में एक दो चिकित्सक ही अपनी ड्यूटी पर तैनात पाये जाते है. डॉक्टर को धरती के भगवान माने जाते है. इस तरह की लापरवाही बरतनेवाले चिकित्सक के खिलाप कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. जिलाध्यक्ष युवा जदयू रूपेश कुमार गुलटेन ने कहा कि जिले में सबसे बदत्तर स्थिति मुरलीगंज पीएचसी की है. ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक के कर्तव्यहीनता के कारण मौत हुई है. अस्पताल में आये दिन कर्मचारियों की कर्तव्यहीनता दिनों दिन बढ़ती जा रही है.
कहते हैं चिकित्सा प्रभारी
अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डा राजेश कुमार ने घटना के संबंध में कहा कि मृतक के परिजनों के द्वारा लगाये गये आरोपो में कितनी सत्यता है. मामले की जांच की जा रही है. दोषी पर उचित कार्रवाई की जायेगी.
परिजनों ने लगाया चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप
मो नीरो के परिजनों ने बताया कि घर पर अचानक मो नीरो को चक्कर आने लगा तभी बेहोशी की हालत में लेकर जब अस्पताल पहुंचे तो चिकित्सक ड्यूटी पर तैनात नहीं थे. सहायक कर्मियों ने जांच कर बताया कि रक्तचाप कम होने की वजह से ऐसी हालत हुई है. डॉक्टर साहब कहां है पूछने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और कहा आप लोग शांत रहिये डॉक्टर साहब आते होंगे. लगभग एक घंटे के बाद डॉक्टर साहब आये और सुई लगा कर मधेपुरा ले जाने को कहा. जब हमलोगों ने उन्हें उठाने की कोशिश की तो पता चला मो नीरो की मौत हो चुकी थी. डॉक्टर की ड्यूटी पर तैनात नहीं होने के कारण मौत हुई है.
सूत्रों की मानें तो मुरलीगंज अस्पताल में चिकित्सक डॉ डीपी रमन हमेशा अपनी मनमानी करते हैं. स्थिति ऐसी है कि अस्पताल में रोगियों के बिस्तर पर चादर तक नहीं बिछे रहते हैं. पेयजल और साफ सफाई की समुचित व्यवस्था नदारद रहती है. रोगी को फर्श पर मजबूरन लेटना पड़ता है.

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