दाताओं का मिले साया तो संवर जायेगी आंचल

उम्र आठ वर्ष, वजन 75 किलो, गरीबी के कारण नहीं हो पा रहा इलाज परिजनों ने छोड़ी ठीक होने की आस मधेपुरा के चौसा स्थित लौआलगान गांव में अपने नाना के यहां रहती है पूर्णिया जिले के बलिया गांव की आंचल बचपन से ही ओबेसिटी बीमारी से ग्रस्त है आंचल मधेपुरा : आंचल जब पैदा […]

उम्र आठ वर्ष, वजन 75 किलो, गरीबी के कारण नहीं हो पा रहा इलाज

परिजनों ने छोड़ी ठीक होने की आस
मधेपुरा के चौसा स्थित लौआलगान गांव में अपने नाना के यहां रहती है पूर्णिया जिले के बलिया गांव की आंचल
बचपन से ही ओबेसिटी बीमारी से ग्रस्त है आंचल
मधेपुरा : आंचल जब पैदा हुई तो मां-बाप ने बड़े प्यार से उसका नाम रखा और जतन से पाला-पोसा. पहले तो मां-बाप और परिजनों ने समझा कि आंचल की परवरिश ही ऐसी हुई कि वह सेहतमंद हो गयी है. लेकिन ज्यों-ज्यों उसकी आयु बढ़ती गयी उसका वजन दिनों दिन बढ़ने लगा. अब स्थिति यह है कि आठ साल की उम्र में ही आंचल का वजन 75 किलो है. इसके कारण आंचल को अपना दैनिक काम करने में भी काफी परेशानी होती है.
आंचल को उसके गरीब मां-बाप ने कई जगह डाक्टरों को दिखाया लेकिन अत्यधिक खर्च के कारण अब इलाज कराने में भी असमर्थ हैं. आंचल को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है. आंचल मधेपुरा के चौसा प्रखंड स्थित लौआलगान पूर्वी पंचायत के वार्ड संख्या तीन निवासी अपने नाना सुरेश साह के यहां ही रहती है.
दाताओं का मिले…
सुरेश साह चौसा प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लौआलगान पूर्वी के वार्ड नंबर तीन के निवासी हैं. उनकी पुत्री रीना देवी का विवाह पूर्णिया जिला के बलिया ग्राम के शंभू साह से हुआ था. आंचल के मामा गोवर्धन साह ने कहा कि आंचल की मां ने उसे छह माह की उम्र में लौआलगान पहुंचा दिया था. आंचल का इलाज कराया गया. इलाज के पहले उसका वजन 85 किलो था. इलाज के बाद वजन में कमी आयी लेकिन अब दवा काम नहीं कर रहा है.
आंचल का वजन इतना है कि वह जहां बैठ जाती है वहां से उसे उठा पाना संभव नहीं हो पाता है. वह खुद से नहीं उठ पाती है और न चल फिर सकती है. उसके नाना कहते हैं कि अभी केवल आठ साल की उम्र में ही आंचल का यह हाल है. जैसे-जैसे उसकी उम्र बढ़ेगी उसका वजन और बढ़ता जायेगा. न जाने अब उसका क्या होगा सोच कर ही दिल दहल जाता है. वे कहां जायें… क्या करें समझ नहीं आता.
चौसा स्थित लौआलगान पूर्वी पंचायत के वार्ड संख्या तीन स्थित अपने नाना के घर रहती है आंचल कुमारी.
बीमार बच्ची के लक्षण से यह पता चलता है कि उसे ओबेसिटी है. उसकी पर्याप्त जांच करायी जाये, तो उसके रिपोर्ट के आधार पर इलाज संभव हो सकता है.
डाॅ एलके लक्ष्मण, शिशु रोग विशेषज्ञ, मधेपुरा

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