सरकार, व्यापारी व चूहे की मार झेल रहे किसान

चिंताजनक. अच्छी कीमत की आस में खलिहान में बोरियों में भर कर रखे जा रहे धान पैक्स अध्यक्ष और सहकारिता विभाग के बीच भुगतान को लेकर तनातनी की वजह से धान खरीद शुरू नहीं हो पायी है. नतीजतन, किसान रबी फसल की तैयारी को पूरा करने के लिए व्यापारी के हाथों ही कम दामों पर […]

चिंताजनक. अच्छी कीमत की आस में खलिहान में बोरियों में भर कर रखे जा रहे धान

पैक्स अध्यक्ष और सहकारिता विभाग के बीच भुगतान को लेकर तनातनी की वजह से धान खरीद शुरू नहीं हो पायी है. नतीजतन, किसान रबी फसल की तैयारी को पूरा करने के लिए व्यापारी के हाथों ही कम दामों पर धान बेचने को मजबूर हैं. इधर, खलिहान में रखे धान चूहों के कारण बरबाद हो रहे हैं.
मधेपुरा : मैं किसान हूं, बड़ा परेशान हूं… खेती कर के खिलाता जहान हूं! धोती मटमैली और गमछी फटी है… गंजी और जूते में चिप्पी सटी है… गरीबी में पलता हूं… हर पल हैरान हूं… मैं किसान हूं..बड़ा परेशान हूं….! मधेपुरा में आत्मा के परियोजना निदेशक राजन बालन की यह कविता जिले के अक्सर सभी किसान गोष्ठियों में किसान गीत की तरह अनिवार्य रूप से पढ़ी जाती है. यह कविता इनदिनों किसानों की सटीक स्थिति को बयां करती है.
नोटबंदी के असर से किसान अब हलकान होने लगे हैं. उनका धान खलिहान में रखा है और नोटबंदी के कारण पैसे की काफी किल्लत हो गयी है. रबी फसल की तैयारी के लिये किसान व्यापारी का मुंह देख रहे हैं. वहीं व्यापारी किसानों का धान खरीदने से पहले खुद को तौल रहे हैं कि वे इस खरीद के कारण खुद को कर के दायरे कितना महफूज रख सकते हैं.
वहीं दूसरी ओर पैक्स अध्यक्ष और सहकारिता विभाग के बीच भुगतान को लेकर तनातनी की वजह से धान खरीद शुरू नहीं हो पायी है. नतीजतन, किसान रबी फसल की तैयारी को पूरा करने के लिए व्यापारी के हाथों ही कम दामों पर धान बेचने को मजबूर हैं. वहीं खलिहान में रखे धान चूहों के कारण बरबाद हो रहे हैं. सरकार, व्यापारी और चूहे के बीच किसान फंसे हैं.
किसान आनन-फानन में बेच रहे धान. रबी की अच्छी उपज के लिए बीज, खाद, दवा छिड़काव व पटवन के लिए राशि की व्यवस्था करनी होती है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए काटी गयी फसल पर ही निर्भर रहना पड़ता है. ऐसी स्थिति में किसान औने-पौने दामों पर धान बेचने पर विवश हैं. वैसे तो द्वितीय श्रेणी के धान की सरकारी खरीद की दर 1470 रूपये तय की गयी है. प्रथम श्रेणी की कीमत 1510 रूपये है. वहीं बाजार में व्यापारी धान सात सौ से 11 सौ तक खरीद रहे हैं. किसान भी अगर व्यापारी को धान न दें तो उपाय भी क्या है. पैक्स में अब तक खरीद शुरू नहीं हुई है. सिंहेश्वर के भवानीपुर के किसान अरूण ने बताया कि उन्होंने बुधवार को ही आननफानन में जरूरत पड़ने पर सात रूपये क्वींटल धान बेचा.
सरकार से ज्यादा व्यापारी हितैषी. मंझले और सीमांत किसानों से अगर पूछें तो सरकार से ज्यादा उनके लिये व्यापारी ज्यादा हितैषी हैं. इसके बारे में सिंहेश्वर के रामपट्टी गांव के किसान बिजेंद्र प्रसाद सिंह कहते हैं कि जरूरत पर जो काम आये वही अपना होता है. किसान अभी गहूं की खेती के लिये एक-एक पैसे के लिये ललायित हो रहे हैं. ऐसे में अगर व्यापारी उनका धान खरीद रहे हैं तो वहीं उनके अपने हैं. व्यापारी ही हैं जो उन्हें पैसे नहीं होने के बाद भी उधार में खाद और बीज देते हैं. किसान धान बेचते हैं तो पैसे देते हैं खेत तैयार करने के लिये ट्रैक्टर, पटवन के लिये तेल और मशीन का खर्च के साथ-साथ बच्चों के लिये सर्दियों के कपड़े ले सके हैं. ऐसे में अगर व्यापारी उनसे दो पैसा कमा लेते हैं तो क्या बुरा करते हैं.
चूहों से भी किसान हलकान
किसान मेहनत से उपजायी अपनी फसल की कीमत के लिये सरकार या बाजार पर निर्भर हैं. थोड़े समर्थ किसान कुछ धान बेच कर बाकी धान अच्छी कीमत मिलने की आस में बोरियों में भर कर रखा है. लेकिन गणेश भगवान की सवारी मूषक इन धान पर मेहरबान हो रहे हैं. चूहों ने किसान की नाक में दम कर रखा है. किसान पंकज सिंह कहते हैं कि उन्होंने मचान बना कर उस पर धान का भंडारण किया है ताकि उसे चूहों से बचाया जा सके. लेकिन चूहों ने उनकी यह कोशिश नाकाम कर दी है. चूहें जमा की गयी धान की बोरियों को काट कर धान अपने बिल में खींच कर ले जाते हैं. सुबह उठते ही खलिहान में धान बिखरा देख कर कलेजा मुंह को आ जाता है. इस स्थिति में किसान खुद को फंसा महसूस कर रहा है.
पैक्स के कमीशन भुगतान के लिये एसएफसी के एमडी से वार्ता हुई है. शीघ्र भुगतान हो जायेगा. इसके अलावा जिन पैक्स का ऑडिट हो गया है, उन्हें कमीशन भुगतान किया जा रहा है. पैक्स द्वारा बीहट के दूर होने की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जिले में फैसीलिटेशन सेंटर खोला गया है. धान खरीद का सांकेतिक लक्ष्य 44 हजार मिट्रीक टन है. वहीं 130 ऑडिटेड पैक्स का चयन किया गया है. धान खरीद ऑनलाइन किया जाना है. इसके लिये अब तक 43 सौ किसान का रजिस्ट्रेशन किया गया है.
आनंद कुमार चौधरी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, मधेपुरा

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