गम्हरिया : पिछले दिनों से पारा 13 डिग्री तक पहुंच गया है. कड़ाके की ठंड प्रखंड व आसपास क्षेत्रों में पड़ने लगी है. दिनों दिन बढ़ती ठंड के चलते जगह – जगह अलाव जलने शुरू हो गये हैं. इसी तरह गरम कपड़ों की डिमांड भी बढ़ गई है. सुबह व शाम के समय बिना गर्म कपड़े के घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में सुबह – सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे और भी परेशान दिखाई दे रहे हैं. इनके सेहत को लेकर उनके पालक भी चिंतित नजर आ रहे हैं. सुबह के पाली में छोटे बच्चों का स्कूल जाना उनके लिए कष्ट दायक हो गया है. सुबह होते ही बसों के इंतजार में खड़े रहने वाले बच्चों की परेशानी देखी नहीं जा रही है.
इस स्थिति में स्कूल के टाइम बढ़ाये जाने की जरूरत महसूस हो रही है. इधर स्कूल प्रबंधन व शिक्षा विभाग को स्कूली बच्चों की परेशानी से कोई सरोकार नहीं है. यही वजह है कि लगातार पारा गिरने के बाद भी स्कूलों के टाइम बढ़ाने की ओर इनका ध्यान नहीं जा रहा है. स्कूल संचालकों की मनमानी व शिक्षा विभाग के उदासीन रवैये को लेकर अभिभावकों में आक्रोश भी दिखाई दे रहा है. उधर, शिशु रोग विशेषज्ञ का कहना है कि ठंड का बच्चों के सेहत पर विशेष रूप से प्रभाव पड़ता है. ठंड से बच्चों में जल्दी से सर्दी खाशी व निमोनिया, बुखार के संभावना रहती है. पिछले कुछ दिनों से इस तरह के बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं. ऐसे में बच्चों को ठंड से बचाना बहुत जरूरी है.
