मधेपुरा: उद्दीपिकाओं को मानदेय नहीं मिलने के मामले में डीएम मो सोहैल द्वारा सख्त कार्रवाई करते हुए नौ सीडीपीओ का वेतन तब तक के लिए स्थगित कर दिया गया है जब तक कि वे अपने प्रखंड के सभी उद्दीपिकाओं का देय मानदेय हेतु मांग-पत्र जिला प्रोग्राम पदाधिकारी आईसीडीएस के कार्यालय में जमा न कर दे़ वहीं डीएम ने जिला प्रोग्राम पदाधिकारी को भी निर्देश दिया है कि अविलंब मांग-पत्र विभाग को भेज कर राशि मंगवाये और उद्दीपिकाओं को मानदेय मिले़ उन्होंने कहा कि इस तरह की कोताही को बरदाश्त नहीं किया जा सकता है़ अपने-अपने कार्यालय को चुस्त-दुरूस्त रखना तथा समय पर मांग-पत्र भेजना अधिकारी की जिम्मेवार है़ अपने जिम्मेवारी का निर्वाह नहीं करने वाले अधिकारी बख्शे नहीं जायेंगे़ चार सीडीपीओ ने ही जमा किया मांग-पत्रइस बाबत उद्दीपिकाओं ने शिकायत की थी कि जिले के बाल विकास परियोजना में उद्दीपिका पद पर परीक्षा लेने के बाद 31 मार्च तक नियोजित किया गया.
लेकिन उनलोगों को सेवा समाप्ति तक एक दिन का भी मानदेय नहीं मिल सका़ इस मामले की जब डीएम ने पड़ताल शुरू की तो डीपीओ राखी कुमारी द्वारा बताया गया कि जिले के 13 सीडीपीओ में से महज 04 सीडीपीओ ने ही उद्दीपिका के देय मानदेय हेतु मांग-पत्र भेजा है़ यही वजह रही कि विभाग को राशि आवंटन हेतु अधियाचना नहीं भेजा जा सका़ इसके बाद बिफरे डीएम ने सख्त कार्रवाई करते हुए मांग-पत्र नहीं भेजने वाले नौ सीडीपीओ का वेतन अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्देश दिया़ इनमें मधेपुरा, सिंहेश्वर, शंकरपुर, घैलाढ़, गम्हरिया, बिहारीगंज, मुरलीगंज, चौसा, एवं आलमनगर प्रखंड के सीडीपीओ शामिल है़ं नहीं मिला था मानदेय सितंबर 2015 में उद्दीपिकाओं को नियोजित किया गया़ मार्च 2016 के बाद इन्हें सेवा विस्तार नहीं दिया गया़ इसकी वजह से नियोजन समाप्त हो गया़ लेकिन उद्दीपिकाओं को एक दिन का भी मानदेय नहीं मिला़ कई प्रखंडों से तो किसी ने मांग भी नहीं की़ लेकिन उद्दीपिका रितू कुमारी, आशा देवी, रेणु कुमारी, शर्मिष्ठा कुमारी, अर्चना कुमारी, नूतन कुमारी ने हिम्मत दिखायी और कई बार आवेदन दिया़ इन्हीं के आवेदन पर कार्रवाई हुई़
