मधेपुरा : प्रसिद्ध साहित्यकार डा श्याम सुंदर घोष लालित-पालित तो हुए मधेपुरा में, परंतु लगभग 60 ग्रंथों की रचना कर झारखंड की धरती पर गोड्डा में उन्होंने अंतिम सांस ली. डा घोष ने अपनी प्रारंभिक दो कृतियों-मधुयामा काव्य-संग्रह एवं नया मसीहा की रचना मधेपुरा में रहकर ही की थी. उन्होंने अवकाश ग्रहण तो किया. गोड्डा कॉलेज के प्राचार्य पद से, लेकिन अधिकांश ग्रथों की रचना की-पटना, बनारस, इलाहाबाद, दिल्ली, जगहों पर रहकर.
प्रसिद्ध साहित्यकार डा श्याम सुंदर घोष के निधन पर उनके बाल संगी व साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि
मधेपुरा : प्रसिद्ध साहित्यकार डा श्याम सुंदर घोष लालित-पालित तो हुए मधेपुरा में, परंतु लगभग 60 ग्रंथों की रचना कर झारखंड की धरती पर गोड्डा में उन्होंने अंतिम सांस ली. डा घोष ने अपनी प्रारंभिक दो कृतियों-मधुयामा काव्य-संग्रह एवं नया मसीहा की रचना मधेपुरा में रहकर ही की थी. उन्होंने अवकाश ग्रहण तो किया. गोड्डा […]

डा घोष के निधन पर कौशिकी क्षेत्र हिंदी साहित्य सम्मेलन के संरक्षक सह पूर्व सांसद व संस्थापक कुलपति डा रमेंद्र कुमार यादव रवि एवं अध्यक्ष सह डा घोष के बालसंगी हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने कहा कि डा घोष का मधेपुरा एवं सहरसा की माटी से पारिवारिक रिश्ता तो था ही. इसके अलावा सहरसा गजेटियर 1965 की पृष्ठ संख्या 60 पर कोसी अंचल के चर्चित साहित्यकारों के तौर पर वर्णित हैं. सम्मेलन में सचिव डा भूपेंद्र मधेपूरी शोकोद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि बुलंद हौसले वाले डा घोष वर्षों बिछावन पर रहकर भी अपनी लेखिनी को गतिशील रखा तथा प्रेमचंद व माखनलाल चतुर्वेदी की रचनाओं की उन्होंने समालोचना भी की और अनेकानेक काव्य संग्रहों व कहानियों का संपादन किया. 1934 में जन्मे श्याम सुंदर घोष के निधन का समाचार सुनते ही साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गयी.
साहित्यानुरागियों एवं साहित्यकारों डा विनय कुमार चौधरी, डा सिदेश्वर काश्यप, दशरिा प्रसाद सिंह, डा आलोक कुमार, उल्लास मुखर्जी, श्यामल कुमार सुमित्र, डा अमोल राय, मयंक द्विजराज, डा अरविंद श्रीवास्तव, राजा भैया आदि ने श्रद्धाजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा. डा घोष अपने साहित्यकीय कालावधि में अनेक सम्मानों एवं पुरस्कारों से नवाजे गये थे.
डा श्याम सुंदर घोष ने अवकाश ग्रहण तो किया गोड्डा कॉलेज के प्राचार्य पद से, लेकिन अधिकांश ग्रथों की रचना की-पटना, बनारस, इलाहाबाद व दिल्ली में रहकर.