कोहरे की चादर में लिपटा शहर, पारा लुढ़का फोटो – मधेपुरा 10,11,12कैप्शन – कोहरे के कारण गाडि़यों का हो राह लाइट जला कर परिचालन, सड़क किनारे अलाव का सहारा लेते लोग, कड़ाके की ठंड में स्कूल जाने को विवश छात्रा —- कड़ाके की ठंड से जनजीवन होने लगा है अस्त व्यस्त-घने कोहरे के कारण रेंग कर चल रहे वाहन, चालक परेशान प्रतिनिधि, मधेपुराजिले में भीषण ठंड का प्रकोप शुरू हो गया है. घने कोहरे के बीच ठंडी हवा के कारण मौसम का पारा बुधवार को गिर कर 11 डिग्री पर पहुंच गया. बुधवार की सुबह शुरू हुई सर्द हवा के बीच हांड़ कंपकपा देने वाली ठंड से आम लोगों को दिन भर भी निजात नहीं मिल सकी. सूर्य देवता भी दिन भर निकले ही नहीं. जिले में मंगलवार की शाम से ही कड़ाके की ठंड का कहर शुरू हो गया है. बुधवार को दिन के करीब दस बजे भी वाहनों को लाइट जला कर चलते देखा गया. इलाके का न्यूनतम तापमान जहां 11 डिग्री रहा, वहीं अधिकतम तापमान 24 डिग्री था.ठंड के कारण घरों में दुबके रहे लोग ठंड के कारण लोग घर में ही दुबके रहे. हल्की पछुवा हवा के कारण ठंड में थोड़ी चुभन भी थी. अब तक गर्म कपड़े से परहेज कर रहे लोग स्वेटर और जैकेट आदि पहन कर कंबल ओढे नजर आये. वहीं दूसरी ओर लोगों ने ठंड से बचने के लिये अलाव का सहारा लिया. जिला मुख्यालय में कचरे के ढेर में लगी आग के आसपास आवारा पशु भी ठंड से राहत पाने की उम्मीद में एकत्रित हो गये. इस सर्द भरी कड़ाके की ठंड से निजात पाने के लिए लोग प्रशासन से अलाव की उम्मीद कर रहे हैं.होने लगी अलाव की मांग अचानक से कोहरा तथा ठंड बढ़ने के कारण लोगों ने प्रशासन से अलाव की मांग की है. कुंदन कुमार, दिलीप कुमार, संतोष कुमार, मनोज कुमार सहित दर्जनों जिलेवासी ने जिला पदाधिकारी मधेपुरा एवं प्रशासन से अनुरोध किया है कि बढ़ती ठंड एवं कोहरा को देखते हुए जिला मुख्यालय एवं प्रखंड मुख्यालय में अलाव की व्यवस्था करने का निर्देश संबंधित अंचलाधिकारी को दें. जिससे प्रखंड बाजार क्षेत्र सहित आसपास के लोगों को ठंड से राहत मिल सके. खासकर ऐसे लोग जिनके पास घर नहीं और वे चौक चौराहे स्टेशन केे आस-पास बस स्टैंड आदि जगहों पर रात गुजारते है. ऐसे लोगों को इस कड़ाके की ठंड से बचने का एक मात्र सहारा अलाव ही है. ऐसे लोग इस ठंड को देखते हुए प्रशासन से उम्मीद लगाये बैठे है, कब प्रशासन अलाव की व्यवस्था एवं गर्म कपड़े लोगों के बीच वितरित करते है. वहीं कुछ प्रखंडों में जनप्रतिनिधियों द्वारा गरीब लोगों के लिए कंबल की व्यवस्था की जा रही है. ठिठुरते बच्चे स्कूल जाने को विवश अगर कोहरे की यही स्थिति रही तो इसका असर स्कूली बच्चों पर पड़ेगा. बच्चों के बीमार होने की आशंका से अभिभावक सशंकित होने लगे हैं.ठंड के कारण सड़क पर पैदल जाने वाले स्कूली बच्चे खास कर ज्यादा प्रभावित हो रहे है .सरकारी विद्यालयों के समय परिवर्तन नहीं होने का सबसे अधिक खामियाजा सुबह सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को भुगतना पर रहा है. वहीं सबेरे कोचिंग क्लास जाने वाले छात्र-छात्राओं को भी परेशानी हो रही है. कड़ाके की ठंड से निजी स्कूल भी अछुता नहीं है. निजी स्कूल के बच्चों को ठंड के कारण सुबह उठ कर स्कूल जाने में परेशानी हो रही है. बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी स्कूल भेजने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बुजूर्गों की बढ़ी परेशानी इस ठंड में बड़े – बुजूर्गों एवं छोटे छोटे बच्चे की परेशानी बढ़ गयी है. चिकित्सकों ने बढ़ते ठंड को देखते हुए बच्चों एवं बुढ़े लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. वहीं दूसरी ओर घने कोहरे के कारण सड़क पर आवागमन बाधित रहा. लोगों को दिन में भी गाडि़यों की लाइट जलाना पड़ रहा है. इस दौरान किसी अनहोनी की आशंका से लोग आशंकित है. ठंड में बरतें सावधानी – गर्म कपड़े का प्रयोग करें- गर्म भोजन का उपयोग करें- ज्यादा ठंड में अलाव का सेवन करें – गर्म पानी से स्नान करें- पानी को उबाल कर पीए – खुले बदन बाहर न निकले – बुढ़े व बच्चे ठंड में नहीं घूमें ऊनी कपड़ों की दुकानों पर बढ़ी भीड़ कड़ाके की ठंड में शहर के ब्रांडेड कपड़ों की दुकान में उलेन कपड़ों की मांग बढ गयी है. रेडिमेड दुकानों में ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है. उलेन कपड़ों में खास कर जैकेट, स्वेटर, मंकी टोपी की मांग अधिक है. शहर स्थिति विभिन्न कंपनी के शो रूम में गर्म कपड़े खरीदने के लिए ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है. छोटी कक्षा के बच्चे बैठते हैं फर्श परप्रतिनिधि, मधेपुराएक ओर सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च किये जा रहे हैं लेकिन विडंबना है कि जिले के नवसृजित विद्यालयों सहित प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए बेंच-डेस्क उपलब्ध नहीं है. इन कक्षा के बच्चों को फर्श पर बैठना पड़ता है. ठंड के मौसम में इन बच्चों का बीमार पड़ना स्वाभाविक है. एक तो शीत लहर उपर से गर्म कपड़े के अभाव के बीच ठंडे फर्श पर बोरियां बिछा कर इन बच्चों का बैठना शिक्षा देने के नाम पर सजा देने जैसा है. आम तौर पर ठंड बढ़ने के बाद स्कूलों को बंद कर दिया जाता है. स्कूल खुला रहने पर भी स्कूल आना बच्चों की मजबूरी है. 72 घंटे रहेगा शीतलहर का प्रकोप एक तरफ जहां जिला प्रशासन द्वारा जिले में अलाव की व्यवस्था नहीं की गयी है. वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि 72 घंटे तक शीतलहर का प्रकोप जारी रहेगा. प्रशासन द्वारा अगर जिले में अलाव की व्यवस्था की भी जाती तो वह कब तक होता है वह देखने की बात होगी.
कोहरे की चादर में लिपटा शहर, पारा लुढ़का
कोहरे की चादर में लिपटा शहर, पारा लुढ़का फोटो – मधेपुरा 10,11,12कैप्शन – कोहरे के कारण गाडि़यों का हो राह लाइट जला कर परिचालन, सड़क किनारे अलाव का सहारा लेते लोग, कड़ाके की ठंड में स्कूल जाने को विवश छात्रा —- कड़ाके की ठंड से जनजीवन होने लगा है अस्त व्यस्त-घने कोहरे के कारण रेंग […]
