आलमनगर : चुनाव का असर इन दिनों हर चीज पर है. बाजार से ले कर खेत खलिहानों तक इससे अछूता नहीं. धान की फसल खेतों में पक कर तैयार है. लेकिन चुनाव के दौरान नेताओं के दौरा शुरू होने व लुभावनी घोषणाओं के पीछे किसान सहित मजदूर व्यस्त हो गये हैं. इसका असर धन कटनी पर व्यापक रूप से देखा जा रहा है.
कहीं अगर किसान मजदूरों से धन काटने को कहते हैं तो मजदूरों का कहना होता है सब दिन तो खेतों में कटाई बुवाई होती रहती है. अभी तो पांच वर्षों का फसल की बुवाई करनी है. जिससे अच्छे फल व आर्थिक समृद्धि आ सके.
वही कुछ मजदूरों का कहना है कि पच साल के बाद बड़ी बड़ी गाडि़या और नेता मंत्री क्षेत्र में आ रहे हैं. उनके साथ खाना घूमना हो रहा है. फिर चुनाव के बाद कहां यह सुख मिल सकेगा.इस बाबत किसान सोनेलाल सिंह कहते हैं कि मजदूर नहीं मिल रहा है. धान पक कर खेतों में तैयार है. ऐसे में धान आधे से अधिक चुनाव होते होते कही झड़ कर खेतों में ही न रह जाये.
वहीं आलमनगर के किसान कर्पूरी शर्मा का कहना है कि धंकतनि के लिए जब मजदूरों के पास जाते हैं तो मजदूर चुनाव के बाद धान काटने की बात कहते हैं कि अभी बिना मेहनत के नेताओं के साथ खान पीना के साथ साथ मजदूरी भी मिल जाती है. ऐसे में क्यों धान काटने जाएं. किसान मोहन मंडल ने बताया कि चुनाव से पूर्व अगर धान की कटनी नहीं हो पायी अगली फसल मक्का की बुवाई में भी विलंब हो जायेगा. इससे आगामी फसल के उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
