मधेपुरा
टिकट पाने की भाग-दौड़ शुरू
मधेपुरा विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में राजद के प्रो चंद्रशेखर ने जदयू के डॉ रमेंद्र कुमार यादव रवि को मतों के बड़े अंतर से हराया था. पिछले चुनाव में कांग्रेस भी मैदान में थी.
इस बार तीनों दल एक ही गंठबंधन के घटक हैं. लोकसभा चुनाव में भी राजद की यहां मजबूत पकड़ रही. यहां उसे सबसे ज्यादा 45.75 फीसदी वोट मिले, जबकि जदयू 29.45 फीसदी वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही थी. इस लिहाज से इस इस सीट पर राजद की दावेदारी पक्की मानी जा रही है.
वहीं एनडीए में भाजपा यहां अपनी लहर मान कर इस सीट पर दावा कर रही है. वहीं पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी भी यहां के चुनावी समीकरण पर भारी पड़ती दिख रही है. हालांकि परदे के पीछे सभी दल अपने मोहरे तैयार कर चुके है. देखना है कि यह सीट किस दल को और उसका टिकट किस नेता को मिलता है.सीट पर कौन दल किसे अपना उम्मीदवार बनाता है.
इन दिनों
महागंठबंधन के कार्यकर्ता स्वाभिमान रैली की तैयारी में जुट गये हैं, तो भाजपा का परिवर्तन रथ घूम रहा है. अन्य दल भी अपना कार्यक्रम कर रहे हैं.
प्रमुख मुद्दे
शिक्षा व्यवस्था में सुधार
शहर का सौंदर्यीकरण
सड़कों मरम्मत
किसानों को सिंचाई व अन्य सुविधाएं.
सिंहेश्वर (सु)
ताल ठोक रहे चुनावी पहलवान
सिंहेश्वर सुरक्षित सीट है. यहां से जदयू के रमेश ऋषिदेव विधायक हैं. 2010 के चुनाव में ऋषिदेव ने राजद के अमित कुमार भारती को हराया था, जबकि भारती अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं.
लोकसभा चुनाव में यहां सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कांग्रेस का रहा था. उसने जदयू को दूसरे और भाजपा को तीसरे स्थान पर रोका था. लिहाजा उसके नेता भी महागंठबंधन के तहत टिकट पाने की उम्मीद कर रहे हैं. वहीं, भाजपा में भी टिकट के दावेदारों की सूची लंबी है.
चूंकि यह सीट सुरक्षित है और लोजपा भाजपा के साथ है. लिहाजा उसे इसका फायदा मिलने की उम्मीद की जा रही है. वैसे लोजपा और रालोसपा की भी इस सीट पर नजर है. लिहाजा यह देखना अभी दिलचस्प होगा कि गंठबंधन की राजनीति में यह सीट किस दल को मिलती है.
इन दिनों
महागंठबंधन की स्वाभिमान रैली की तैयारी चल रही है. भाजपा का परिवर्तन रथ गांव-गांव घूम रहा है. अन्य दलों की भी सक्रियता तेज हुइ है.
प्रमुख मुद्दे
ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा
पुल पुलिया का निर्माण
सिंचाई की सुविधा रोजगार के साधन.
बिहारीगंज
नेताओं ने बदली हैं पार्टियां
बिहारगंज विधानसभा सीट फिलवक्त जनता दल यूनाइटेड के कब्जे में है. इसकी रेणु कुशवाहा ने पिछले चुनाव में राजद के प्रभाष कुमार को करीब 32 फीसदी वोटों के बड़े अंतर से हराया था.
कांग्रेस 18.5 फीसदी वोट के साथ तीसरे स्थान पर रही थी, जबकि अन्य उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हो गयीं थीं. इस बार ये तीनों दल एक ही गंठबंधन में हैं. सेटिंग गेटिंग के तहत यह सीट जदयू को मिल सकती है. यहां के राजनीतिक समीकरण में काफी बदलाव आया है.
विधायक के पति विजय कुशवाहा विगत लोकसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार थे और कुशवाहा को पार्टी विरोधी गतिविधि में लिप्त होने के आधार पर मंत्री पद गवाना पड़ा था. पूर्व मंत्री रवींद्र चरण यादव आरजेडी छोड़ भाजपा में शामिल हो गये हैं. पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी का भी यहां दबदबा है.
हालांकि अभी तक उन्होंने अपना पत्ता नहींखोला है कि उनकी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी या फिर एनडीए के साथ जायेगी. वैसे यह तय है कि उनका निर्णय भी इस सीट के परिणाम को प्रभावित करेगा.
इन दिनों
भाजपा का बूथ स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न. परिवर्तन रथ घूम रहा है. महागंठबंधन स्वाभिमान रैली की तैयारी में जुटा है.
प्रमुख मुद्दे
गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास
स्टेट हाइवे की मरम्मत
बाढ़ से बचाव की व्यस्था
रोजगार
आलमनगर
सज गया राजनीतिक अखाड़ा
इस सीट पर फिलवक्त जदयू का कब्जा है. इसके विधायक नरेंद्र नारायण यादव राज्य सरकार में राजस्व व भूमि सुधार मंत्री हैं. यादव लगातार चार बार यहां से विधायक चुने गये हैं. पिछली बार उन्होंने कांग्रेस की लवली आनंद को करीब 28 फीसदी वोटों के अंतर से हराया था. भाजपा से अलग होने के बाद भी इस क्षेत्र में जदयू की पकड़ मजबूत रही है.
लोकसभा चुनाव में उसे यहां सबसे ज्यादा वोट मिले थे. हालांकि इस बीच राजद व जदयू के कई नेता पार्टी बदल कर भाजपा में शामिल हुए हैं. एनडीए में टिकट के सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा के हैं. लोकसभा चुनाव में इसे केवल 28 फीसदी से कम वोट मिले थे, लेकिन क्षेत्र में परिवर्तन की लहर को आधार मान कर इसके नेता इस सीट और पार्टी के टिकट पर दावे कर रहे हैं.
बाढ़ग्रस्त होने के कारण यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ है. लिहाजा हर चुनाव में विकास का राजनीतिक भरोसा यहां प्रभावी रहा है.
इन दिनों
भाजपा परिवर्तन रथ के जरिये क्षेत्र में बदलाव की हवा तैयार करने में जुटी है. महागंठबंधन स्वाभिमान रैली को सफल बनाने में लगा है.
प्रमुख मुद्दे
बाढ़ से बचाव
गांवों का बुनियादी विकासत्नआवागमन की सुविधा.
