* बाबा सिंहेश्वर मंदिर में उमड़ी महिला व पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़
मधेपुरा : प्रसिद्ध बाबा सिहेंश्वर नाथ मंदिर में मंगलवार को सावन के पहले दिन हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया. सुबह होते ही बड़ी संख्या में महिला व पुरुष भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन द्वारा समुचित व्यवस्था की गयी थी.
सुरक्षा के जहां पुख्ता इंतजाम किये गये हैं. वहीं चौकसी बरतने के लिए मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगाया गया. ताकि हर आने जाने वाले लोगों पर प्रशासन व न्यास समिति के कार्यकर्ताओं की पैनी नजर रहे. मालूम हो कि बाबा सिंहेश्वर नाथ की महिमा ही कुछ ऐसी है कि सच्चे मन, लगन, आस्था और विश्वास के साथ जो भी भक्त भगवान की पूजा– अर्चना करते है उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है. मालूम हो कि सावन के पवित्र मौके पर देश – विदेश से श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए यहां आते हैं.
* कौशिकी तट पर शिव मंदिर
शिव पुराण में कौशिकी तट पर शिव मंदिर का वर्णन है. चतुर्थी कोटि रूद्र संहिता के अध्याय –दो में लिखे श्लोक ‘भूतेश्वरो य: समप्रोक्तों भक्त सर्वार्थ: सदा। नारीश्वर इति रम्यात: कौशिक्या स समीपग:।।’ अर्थात भूतेश्वर तथा नारीश्वर नामक यह शिव लिंग कौशिकी तट पर विराजमान हैं. ‘नागेश्वरस्तु कौशिक्यास्तीरे तिष्ठाति नित्यश:। अनंतेश्वर संझश्च कल्याण शुभ भाजन:।।’ यानी कोशी नदी के तट पर नागेश्वर लिंग हैं, जो कल्याण प्रद एवं शुभकर्ता अनंतेश्वर लिंग हैं.
* जलाभिषेक से होते हैं प्रसन्न
संजीव कुमार मुन्ना ने बताया कि देवाधिदेव महादेव को रूद्र कहा जाता है. शिव अग्नि के प्रतीक है. रूद्र के ऊर्ध्व लिंग की शिखा ऊपर की और वैसे ही उठी रहती है, जैसे अग्नि की शिखा ऊपर को उठती है तथा शिव लिंग को इसलिए ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है. इसलिए शिव जल के अभिषेक से प्रसन्न होते हैं.
