फोटो- कैंपस 9कैप्शन- मूल प्रमाण पत्र के लिए सन 2007 का चलान दिखाते छात्र प्रतिनिधि, मधेपुरा भूपेंद्र नारायण मंडल विवि शुरुआती काल से ही विवादों के घेरे में रही है. विवि में फिर से शुल्क बढ़ाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है. शिक्षा विद् का मानना है कि पहले विवि में शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लानी होगी. लेकिन व्यवस्था को दुरुस्त करने से पहले विवि ने शुल्क बढ़ा दी. छात्रों का कहना है कि विवि में आज भी मूल प्रमाण पत्र सहित अन्य प्रमाण पत्र लेने के लिए वर्षों चक्कर काटना पड़ता. इसके बाद भी सफलता नहीं मिलती है. विवि परिसर स्थित परीक्षा विभाग में बुधवार को सहरसा का छात्र सकलदेव चौपाल ने कहा कि सात वर्षों से स्नातक के मूल प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे है. सन 2007 में मूल प्रमाण पत्र के लिए विवि में जमा किये फी की चलान भी सकलदेव ने दिखायी. विवि के लापरवाही के कारण हजारों मेधावी छात्र इधर-उधर भटक रहे है. स्नातक उत्तीर्ण कर चुके कई छात्रों का रिजल्ट स्नातक द्वितीय खंड के कारण लंबित है. छात्र बताते है कि स्नातक सत्र 2012-13 में द्वितीय खंड का रिजल्ट प्रकाशित होने के तुरंत बाद तृतीय खंड की परीक्षा फार्म भराई गयी थी. जिसके कारण छात्रों को दावा करने का मौका नहीं मिला. इसके बाद द्वितीय खंड के मार्क्स दिये बिना छात्रों का तृतीय खंड के लिए फार्म भरवाया गया था.
शैक्षणिक व्यवस्था सुधरी नहीं, लेकिन बढ़ा दी गयी फीस
फोटो- कैंपस 9कैप्शन- मूल प्रमाण पत्र के लिए सन 2007 का चलान दिखाते छात्र प्रतिनिधि, मधेपुरा भूपेंद्र नारायण मंडल विवि शुरुआती काल से ही विवादों के घेरे में रही है. विवि में फिर से शुल्क बढ़ाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है. शिक्षा विद् का मानना है कि पहले विवि में शैक्षणिक व्यवस्था को […]
