मधेपुरा : शहर की एक घनी आबादी रोज बड़े प्रदूषण को झेल रही है. यह प्रदूषण अनावश्यक है. इसकी रोजमर्रा की जिंदगी में कोई जगह नहीं. प्रदूषण इतना भयावह और खतरनाक है कि आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे. सफेद धूल वाली यह प्रदूषण सीधे लोगों की छाती में जा कर जम रही है. संभावना जतायी जा रही है कि छाती में जम रही धूल भविष्य में ला इलाज बीमारी का रूप ले सकती है.
हम बात कर रहे हैं रेलवे स्टेशन के दक्षिण दिशा में संचालित रैक प्वाइंट की. इस रैक प्वाइंट पर ऐसे तो कई प्रकार की सामग्रियां आती है, लेकिन सीमेंट का आवक ज्यादा है. सीमेंट की ढुलाई के लिए मालगाड़ी पर सैकड़ों मजदूर लगे रहते है. साथ ही अनगिनत ढुलाई वाहन धूल उड़ाते सो अलग हैं. ढुलाई के दौरान स्टेशन व रैक प्वाइंट के आसपास बसी हजारों की आबादी धूल की जद में रहती है.
नतीजन वहां बसे लोगों पर गंभीर बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है. विडंबना यह हैं कि जिला प्रशासन या रेल प्रशासन धूल, प्रदूषण से होने वाले खतरे से अनजान है. खतरे से जनमानस को बचाने की दिशा में कोई पहल नहीं कर रहे हैं.
क्या है विकल्प: स्थानीय लोगों का कहना है कि दौरम मधेपुरा स्टेशन स्थित रैक प्वाइंट को शहर से अन्यत्र दूर बुधमा या मिठाई स्थांतरित करने का निर्णय जिला प्रशासन व रेल प्रशासन को जल्द ही लेना चाहिए. जिससे रेल यात्रियों व स्थानीय लोगों को प्रदूषण से छुटकारा मिल सके.
कहते हैं जानकार
स्वास्थ्य संबंधी जानकर व चिकित्सकों का कहना हैं कि धूल व प्रदूषण से जनमानस को हृदय, फेफड़ा, गला, मस्तिष्क सहित अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती है. खासकर बच्चों व बुजुर्गों को धूल, मिट्टी से होने वाले प्रदूषण से बच कर रहना चाहिये.
कहते हैं स्थानीय लोग
रैक प्वाइंट के आस-पास स्थायी तौर पर निवास करने वाले उमेश कुमार, कुंदन कुमार, कन्हैया, अनिल, अख्तर खान, सिकंदर, संतोष, विपिन, अनीश यादव, रोहित यादव, महेश प्रसाद यादव, हरी मंडल, उषा देवी, मीना देवी सहित दर्जनों ने अपनी परेशानी बयां करते हुए कहा कि जबसे रैक प्वाइंट शुरू हुआ है तब से यहां अत्यधिक धूल उड़ रही है. रैक पोइंट के फर्श पर जमी धूल वाहनों के अनवरत चलने से हमेशा वातावरण को प्रदूषित करती रहती है. इन लोगों ने कहा कि सीमेंट का डस्ट तो स्वास्थ्य के लिए ज्यादा हानिकारक है.
