मधेपुरा : सरकार भले ही आइसीडीएस के माध्यम से सुदूर ग्रामीण इलाकों के नोनीहाल बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से पहला पाठशाला के रूप में शिक्षा के साथ – साथ कुपोषणमुक्त बनाने हेतु लाखों रूपया महीनों खर्च करती है. लेकिन स्थानीय स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्र के सेविका और स्थानीय पदाधिकारी के मिलीभगत से केंद्र को अधिकांश दिनों कागज पर ही संचालित किया जाता है. इसका बानगी शुक्रवार को प्रखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत बेहरी के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 19 पर देखने को मिला.
यह कि दिन के साढ़े 11 बजे तक केंद्र पर एक भी बच्चा या सेविका सहायिका उपस्थित नहीं थी. बल्कि सामुदायिक भवन में चल रहे आंगनबाड़ी बच्चे नहीं आस पड़ोस के लोगों का सोने का बसेरा बना हुआ था. जब इस बाबत केंद्र के अगल-बगल के ग्रामीणों से जानकारी लिया गया, तो ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश दिनों आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति ऐसी ही रहती है. कभी भी इस केंद्र का निरीक्षण किसी स्थानीय पदाधिकारी या जिले के किसी अधिकारी के द्वारा नहीं किया जाता है. इस वजह से सेविका के द्वारा अपने नियम कानून के तहत केंद्र को खोला और बंद किया जाता है. वहीं आंगनबाड़ी केंद्र में आंगनबाड़ी के सामग्री के साथ साथ स्थानीय लोगों का भी समान केंद्र के अंदर सुरक्षित रखा जाता है और केंद्र का रखरखाव भी स्थानीय खास लोगों के हाथों होता है.
जबकि उक्त आंगनबाड़ी केंद्र में 40 बच्चे नामांकित है और अधिकांश दिनों केंद्र संचालन में 35 से 40 बच्चों की उपस्थिति रजिस्ट्रर पर दर्ज किया जाता है. सिंहेश्वर सीडीपीओ के पद पर कुमारी श्वेता पद स्थापित है. वे तीन-तीन जगह सीडीपीओ के प्रभार में है. तीनों परियोजनाओं के सैकड़ों आंगनबाड़ी केंद्रोंकी देखरेख सिर्फ बैठे-बैठे ही खानापूर्ति कर लेते हैं. नियमित प्रखंड परियोजना पदाधिकारी नहीं रहने के कारण सिंहेश्वर बाल विकास परियोजना में कार्यरत महिला पर्यवेक्षिकाएं के द्वारा भी नियमित केंद्र की जांच बैठे बैठे सेविकाओं की रजिस्टर मंगाकर खानापूरी कर दी जाती है.
उन्हें आये हुये मात्र एक महीना हुआ है. सभी बातों को ठीक से समझ नहीं पायी है. हालांकि उक्त केंद्र की जांच कर दोषी पाये जाने पर कार्रवाई की जायेगी.
कुमारी श्वेता, सीडीपीओ, सिंहेश्वर, मधेपुरा.
