मधेपुरा : नौ बैंकों के कर्मचारी संगठनों की ओर से यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के तत्वावधान में मंगलवार को बैंकिंग प्रणाली में सुधार के कदम को जनविरोधी करार देते हुए हड़ताल की. इस वजह से जिले में 80 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ.
बैंककर्मियों की मांग है कि नोटबंदी के कारण कराये गये अतिरिक्त काम का मुआवजा दिया जाए और कर्ज नहीं चुकाने वाले बड़े कर्जदारों पर कार्रवाई की जाय. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के बैनर तले नौ यूनियन एकजुट हैं, इनमें एआइबीइए, एआइबीओसी, एनसीबीइ, एआइबीओए, बीइएफआइ, आइएनबीएफएफ, आइएनबीओसी, एनओबीडब्लयू व एनओबीओ शामिल है. जिले में अकेले एसबीआइ की मुख्य शाखा द्वारा लगभग 40 करोड़ का कारोबार प्रतिदिन होता है़
इसके अलावा अन्य शाखाएं भी कार्य करती है. ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (एआइबीइए) के नेताओं ने कहा भारतीय बैंकिंग उद्योग को असली खतरा डूबे हुए बड़े कर्ज और जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों से है.
बैंक यूनियनों ने भारतीय स्तर पर हड़ताल का नोटिस दिया है. श्रमिक वर्ग अपनी मांगे मनवाने के लिए अंतिम हथियार के रूप में हड़ताल का प्रयोग करता आ रहा है. हालांकि हड़ताल न तो मजदूर वर्ग चाहता है और न ही प्रबंधन. हड़ताल हमेशा सांकेतिक रूप से की जाती है न कि देश की जनता को कष्ट पहुंचाने के उद्देश्य से.
हड़ताल का उद्देश्य सरकार की गलत नीतियों को जनता तक पहुंचाना होता है. यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ व बैंकों के विलय, निजीकरण,लेबर कानून में बदलाव, नौकरी की सुरक्षा जैसे गम्भीर विषयों को लेकर की जा रही है. मौके भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य शाखा प्रबंधक संजय कुमार करण, द्रवीण कुमार ठाकुर, कुंदन कुमार, अविनाश कुमार, आशीष कुमार, संजीव रंजन दास, अरूण कुमार श्रीवास्तव, मनीष कुमार, आदित्य कुमार, कामेश्वर चौधरी, संजय कुमार, दीपक कुमार आदि मौजूद थे.
