मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विवि में ढाई करोड़ की नन टियरेबल मार्क्स सीट व प्रमाण पत्र में गड़बड़ी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि पूर्व कुलपति के आवास से हुई मेडिकल कॉपी की जांच मामले में राजभवन से चार दिन पहले शोकॉज पर विवि में हड़कंप मच गया है.
मेडिकल कॉपी की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. हालांकि बीएनएमयू के वर्तमान कुलपति प्रो डॉ अवध किशोर राय व प्रतिकुलपति प्रो डॉ फारूक अली पदभार ग्रहण करने से पूर्व के हरेक मामलों पर पैनी नजर बनाये हुए हैं. उन्होंने राजभवन के पत्र के आलोक में परीक्षा नियंत्रक से मेडिकल परीक्षा की कॉपी जांच में अपनायी गयी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी मांगी है.
उसमें मेडिकल कॉपी जांच करनेवाले परीक्षकों की सूची की भी मांग की गयी है.
उधर, परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि परीक्षकों की सूची समर्पित कर दी जायेगी. राजभवन के शोकॉज के बाद वर्तमान कुलपति के सख्ती से मेडिकल कॉपी जांच मामले में गड़बड़ी का खुलासा होने लगा है. इसमें नियम परिनियम को ताक पर रख कॉपी का मूल्यांकन, पूर्णमूल्यांकन कराने व प्रतिवर्ष एमबीबीएस के छात्रों को दिये गये ग्रेस मार्क्स का मामला शामिल है.
शिकायत पर राजभवन ने शुरू की जांच
मेडिकल कॉपी की जांच में हुई गड़बड़ी की शिकायत राजभवन से की गयी थी. इसके बाद राजभवन ने इस संदर्भ में जांच करते हुए विवि से जवाब तलब किया है.
कहा गया है कि नियमों के तहत मेडिकल कॉपी का मूल्यांकन व पुनर्मूल्याकंन हुआ या नहीं. जांच करीब एक माह से चल रहा है. पूर्व में राजभवन ने शोकॉज करते हुए मेडिकल कॉपी की जांच में गड़बड़ी की शिकायत पर विवि को तलब किया था, तो जवाब में कहा गया कि मेडिकल की कॉपी पूर्व कुलपति के आवास पर भेजी गयी थी. वहां से कॉपी की जांच करायी गयी. परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिया गया है कि नियम परिनियम को ताक पर रख अगर आपके वरीयतम अधिकारी कोई आदेश दें, तो उसका पालन न करें.
परीक्षकों की सूची पर है विवि की नजर
शोकॉज पर वर्तमान कुलपति सजग है. उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षा नियंत्रक से मेडिकल परीक्षा की कॉपी जांच के परीक्षकों की सूची समर्पित करने को कहा है. इससे स्पष्ट हो जायेगा कि परीक्षा का मूल्यांकन या पूर्णमूल्यांकन कहां हुआ ओर किन परीक्षकों ने कॉपी की जांच की. अगर पूर्व के परीक्षक या नये परीक्षकों से कॉपी जांच करायी गयी और उसकी सूची उपलब्ध नहीं करायी गयी, तो राजभवन का शक सही साबित होगा. चूंकि नियम परिनियम के अनुसार परीक्षा की कॉपी विवि से जांच के लिए या तो को-ऑर्डिनेटर के पास जायेगी या परीक्षा बोर्ड से अनुमोदित परीक्षकों के पास, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कॉपी सीधे पूर्व कुलपति के आवास पर कॉपी चली गयी और राजभवन ने सवाल खड़ा कर दिया.
नियम विरुद्ध हुआ रिजल्ट, तो डिग्री होगी रद्द
इस प्रकरण के बाद पूर्व के मेडिकल छात्रों की डिग्री पर तलवार लटकने लगा है. इस संबंध में प्रतिकुलपति प्रो डॉ फारूक अली ने कहा कि अगर नियम विरुद्ध मूल्यांकन, पूर्णमूल्यांकन या ग्रेस देकर रिजल्ट दिया गया होगा, तो उन छात्रों की डिग्री रद्द ही जायेगी. उन्होंने कहा कि एमसीआइ के नियमानुकूल अगर हुआ होगा, तो उनकी डिग्री मान्य होगी.
उन्होंने कहा कि जिन मामलों में प्रथम दृष्टया साक्ष्य उपलब्ध होंगे उन पर विधिसम्मत कार्रवाई की जायेगी. कार्रवाई करने से विवि पीछे नहीं हटेगा. ग्रेस के मामले में प्रोवीसी ने कहा कि कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं रहने के कारण छात्र हित में ग्रेस दिया जाता है. वहीं मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार कोई छात्र परीक्षा में एक विषय में अनुत्तीर्ण है तो ही उसे पांच या उससे कम अंक ग्रेस के रूप में मिलेगा.
पूर्व के मेडिकल कॉपी जांच मामले में राजभवन ने शोकॉज किया है. इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षा नियंत्रक को कॉपी जांच के दौरान अपनायी गयी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी के साथ परीक्षकों के नामों की सूची समर्पित करने का निर्देश दिया गया है.
प्रो डॉ एके राय, कुलपति, बीएनएमयू
