लखीसराय जिले के हलसी अंचल अंतर्गत मौजा हलसी में जल संसाधन और सिंचाई व्यवस्था पर भू-माफिया व अतिक्रमणकारियों की बुरी नजर लग गई है. सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज पारंपरिक प्राकृतिक पैन पर अवैध रूप से मिट्टी भरकर अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे खेतों तक जाने वाला पानी पूरी तरह ठप हो गया है. नतीजतन, इलाके के करीब एक हजार बीघा में लगी धान की फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई है. जब प्रशासनिक अधिकारियों ने शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया, तो मंगलवार को आक्रोशित किसानों ने खुद श्रमदान और जेसीबी के जरिए पैन की सफाई का जिम्मा उठा लिया.
राजस्व अभिलेख में दर्ज है पैन, मिट्टी भरकर रोका पानी का रास्ता
सरकारी दस्तावेजों में सार्वजनिक होने के बावजूद इस प्राकृतिक सिंचाई संसाधन को बंद कर दिया गया है:
- राजस्व रिकॉर्ड का विवरण: ग्रामीणों के अनुसार, मौजा हलसी के खाता संख्या 411 और खसरा संख्या 3832 में लगभग 17 डिसमिल भूमि राजस्व अभिलेख में प्राकृतिक पैन के रूप में दर्ज है.
- सिंचाई का मुख्य आधार: यह पैन वर्षों से स्थानीय किसानों के लिए जीवनरेखा रहा है. बारिश और संचित जल इसी रास्ते से खेतों तक पहुंचता था.
- अतिक्रमण का खेल: पैन की भूमि पर जगह-जगह मिट्टी डालकर अवैध कब्जा कर लिया गया, जिससे पैन की चौड़ाई व गहराई घट गई और पानी का बहाव पूरी तरह अवरुद्ध हो गया.
1000 बीघा धान की फसल पर संकट, आवेदन के बाद भी बेपरवाह रहा प्रशासन
धान की रोपाई के बाद इस समय फसलों को पानी की सख्त दरकार है:
- सूखने लगी फसल: पानी की सप्लाई बंद होने से करीब एक हजार बीघा कृषि भूमि की सिंचाई ठप हो गई है, जिससे किसानों की मेहनत बर्बाद होने की आशंका है.
- अधिकारियों की चुप्पी: किसानों ने पूर्व में जिलाधिकारी (DM), अंचल अधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर अमीन से पैमाइश, सीमांकन और पैन की उड़ाही कराने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
जब सिस्टम सोया तो किसानों ने खुद संभाला मोर्चा
प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर अन्नदाताओं ने खुद ही मैदान में उतरने का फैसला किया:
- श्रमदान और जेसीबी से सफाई: मंगलवार को दर्जनों किसानों ने एकजुट होकर फावड़ा उठाया और जेसीबी मंगवाकर पैन में जमी मिट्टी व कचरे को साफ किया, ताकि खेतों की ओर पानी का प्रवाह दोबारा चालू हो सके.
- दोषियों पर एक्शन की मांग: किसानों ने दो टूक कहा कि पैन किसी की निजी जागीर नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति है. उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल स्थायी सीमांकन कराने, अतिक्रमणकारियों पर कानूनी कार्रवाई करने और पैन को पूरी तरह अतिक्रमणमुक्त करने की मांग की है.
