लखीसराय से अजीत सिंह एवं देव कुमार की रिपोर्ट: जिले में हुई बेमौसम बारिश ने नगर परिषद के सफाई दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं. शहर के मुख्य मार्गों से लेकर गलियों तक की स्थिति नारकीय हो चुकी है. जलजमाव और सड़ते कूड़े की बदबू ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. आलम यह है कि सफाई पर हर माह करीब 46 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद मानसून से पहले ही शहर टापू में तब्दील नजर आ रहा है.
जगह-जगह जलजमाव, राहगीर परेशान
रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण नया बाजार के कबैया रोड, बाजार समिति (वार्ड नंबर 30), पुरानी बाजार के सदर प्रखंड परिसर और बड़ी पोखर जैसे इलाकों में भारी जलजमाव हो गया है. अभी मानसून की असली बारिश बाकी है, लेकिन वर्तमान हालात को देखकर स्थानीय लोग आने वाले दिनों की कल्पना से ही सिहर उठ रहे हैं. सड़कों पर जमा पानी और कीचड़ के कारण राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है.
कूड़े की सड़ांध से घरों में रहना मुश्किल
वार्ड नंबर 11 सहित शहर के कई व्यस्त इलाकों में कूड़ा सड़कों पर बिखर चुका है. बारिश के कारण कूड़ा गलने लगा है, जिससे उठने वाली भीषण दुर्गंध ने आसपास के निवासियों और दुकानदारों का जीना मुहाल कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बदबू के कारण अब घरों में बैठना भी दुश्वार हो गया है, लेकिन नगर परिषद इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है.
सफाई बजट पर उठे सवाल: कहां जा रहे लाखों रुपये?
नगर परिषद शहर की साफ-सफाई पर प्रतिमाह 43 से 46 लाख रुपये खर्च करता है. एनजीओ के माध्यम से डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव का दावा भी किया जाता है. बावजूद इसके शहर की बदहाली ने सफाई व्यवस्था पर बड़े प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं. कई वार्ड पार्षदों ने आरोप लगाया कि गंदगी की सूचना देने के बाद भी अधिकारी सफाई कर्मियों को नहीं भेजते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है.
अधिकारी ने क्या कहा
इस संबंध में स्वच्छता पदाधिकारी प्रवीण कुमार सिन्हा ने कहा कि दोपहर तक डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव का कार्य किया जाता है और उसके बाद गलियों से कचरा उठाया जाता है. उन्होंने दावा किया कि जहां भी कूड़ा रह जाने की सूचना मिलती है, उसे तत्काल उठा लिया जाता है. हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट नजर आ रही है.
