लखीसराय में लाखों खर्च, अभियान भी चला, फिर भी नहीं बदली तस्वीर, गढ़ी बिशनपुर में कचरे के ढेर पर दम तोड़ रही स्वच्छता योजना

Lakhisari News : डीडीसी ने खुद झाड़ू उठाकर स्वच्छता का संदेश दिया, लाखों रुपये खर्च कर कचरा प्रबंधन केंद्र बनाया गया, सफाई उपकरण और ई-रिक्शा खरीदे गए. इसके बावजूद गढ़ी बिशनपुर पंचायत आज भी कचरे के ढेर, अधूरी सुविधाओं और बदहाल स्वच्छता व्यवस्था से जूझ रही है. सवाल यह है कि आखिर स्वच्छ भारत मिशन की योजनाएं जमीन पर क्यों नहीं उतर पा रहीं?

लखीसराय से अजीत सिंह की रिपोर्ट

Lakhisari News : लखीसराय जिले की गढ़ी बिशनपुर पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत चलाए गए ”स्वच्छता ही सेवा” अभियान का असर अब फीका पड़ता नजर आ रहा है. पिछले वर्ष जिला प्रशासन की पहल और लाखों रुपये के खर्च के बावजूद पंचायत को आदर्श स्वच्छ पंचायत बनाने का सपना अधूरा रह गया. वार्ड नंबर नौ समेत कई इलाकों में आज भी कचरे का अंबार लगा है और ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

डीडीसी ने झाड़ू उठाकर दिया था स्वच्छता का संदेश

सितंबर 2025 में आयोजित ”स्वच्छता ही सेवा” पखवाड़ा के दौरान तत्कालीन डीडीसी सुमित कुमार ने एनएच-80 किनारे जमा पुराने कचरे की स्वयं सफाई कर लोगों को स्वच्छता का संदेश दिया था. जनसंवाद कार्यक्रम में उन्होंने ग्रामीणों से साफ-सफाई को जन आंदोलन बनाने की अपील करते हुए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी तय की थी.

कचरा प्रबंधन पर खर्च हुए लाखों रुपये

पंचायत में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर कचरा प्रबंधन एवं निस्तारण केंद्र बनाया गया. कचरा संग्रहण के लिए सफाई उपकरण खरीदे गए और परिवहन के लिए पैडल रिक्शा तथा ई-रिक्शा की व्यवस्था भी की गई. शुरुआती दिनों में व्यवस्था ठीक-ठाक चली, लेकिन कुछ समय बाद पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई.

वार्ड नंबर नौ में वर्षों से लगा है कचरे का ढेर

ग्रामीण बैंक के पीछे स्थित वार्ड नंबर नौ की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बताई जा रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां वर्षों से एक स्थान पर कचरा जमा किया जा रहा है, लेकिन उसका नियमित उठाव नहीं हो रहा. कचरे का अपशिष्ट आसपास के खेतों तक पहुंच रहा है, जिससे किसानों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही है.

नल-जल योजना का लाभ भी नहीं पहुंचा

ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छता व्यवस्था के साथ-साथ ”हर घर नल का जल” योजना का लाभ भी उन्हें आज तक नहीं मिल सका है. कई परिवार अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. इतना ही नहीं, मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क या पगडंडी की व्यवस्था भी नहीं है.

शुल्क वसूली नहीं हुई, ठप हो गई व्यवस्था

स्वच्छता व्यवस्था के संचालन के लिए प्रत्येक घर से 30 रुपये मासिक शुल्क लेने की योजना बनाई गई थी. इसकी जिम्मेदारी पंचायत प्रतिनिधियों को सौंपी गई थी. ग्रामीणों का आरोप है कि शुल्क संग्रहण की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से नहीं चल सकी, जिसके कारण सफाई कार्य प्रभावित हो गया और पूरा तंत्र धीरे-धीरे निष्क्रिय हो गया.

मुखिया प्रतिनिधि ने फंड की कमी बतायी

मुखिया प्रतिनिधि मनोज कुमार का कहना है कि पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण सफाईकर्मियों का भुगतान और मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है. हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर स्वच्छता से जुड़े राजस्व संग्रह और जनजागरूकता कार्यक्रमों को गंभीरता से नहीं लिया गया.

स्वच्छता के प्रति जागरूकता का भी अभाव

स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत में स्वच्छता को लेकर नियमित जागरूकता अभियान नहीं चलाए गए. कचरा प्रबंधन केंद्र और उपकरण होने के बावजूद उनका समुचित उपयोग नहीं किया गया. परिणामस्वरूप पंचायत फिर से पुरानी स्थिति में लौटती दिखाई दे रही है.

क्या बोले बीडीओ

इस संबंध में बीडीओ पल्लवी सागर ने कहा कि पंचायतों को अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाती है और साफ-सफाई बनाए रखना जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित कर्मियों की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी ली जाएगी और मुखिया से बातचीत कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

सवालों के घेरे में स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत

गढ़ी बिशनपुर की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि जब संसाधन, बजट और प्रशासनिक पहल सब कुछ उपलब्ध था, तो स्वच्छता व्यवस्था स्थायी रूप से क्यों नहीं बन पाई. अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में ठोस पहल कर पंचायत को वास्तव में स्वच्छ और आदर्श बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: AMIT KUMAR SINH

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More
Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >