सूर्यगढ़ा (लखीसराय) से राजेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
Snake Bite : एक जहरीले सांप के डंसने के बाद जिंदगी और मौत से जूझ रही थी, लेकिन परिवार इलाज के बजाय झाड़फूंक में उम्मीद तलाशता रहा. जब तक अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. लखीसराय की यह घटना अंधविश्वास की कीमत की दर्दनाक कहानी बन गई है.
घर में झाड़ू लगाते समय सांप ने डसा
जानकारी के अनुसार निस्ता गांव के वार्ड संख्या-8 निवासी सुबोध यादव उर्फ हगो की 46 वर्षीय पत्नी रेखा देवी मंगलवार सुबह करीब पांच बजे अपने घर में झाड़ू लगा रही थीं. इसी दौरान घर में मौजूद एक बिल से निकले जहरीले सांप ने उन्हें डस लिया.सांप के काटने के तुरंत बाद रेखा देवी ने अपनी बेटी को इसकी जानकारी दी और शरीर पर डंसे गए स्थान को भी दिखाया. परिवार को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा था, लेकिन इसके बावजूद समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं ली गई.
अस्पताल की जगह पहले पहुंच गए झाड़फूंक कराने
परिजनों ने महिला को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय गांव के एक देव स्थान पर पहुंचाया, जहां झाड़फूंक और ओझा-गुनी के माध्यम से इलाज की कोशिश की गई. काफी देर तक इसी प्रक्रिया में समय बीतता रहा और महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई.जब स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई, तब उन्हें सूर्यगढ़ा के एक निजी क्लीनिक ले जाया गया. वहां चिकित्सकों ने हालत नाजुक बताते हुए इलाज करने से इनकार कर दिया.
सदर अस्पताल पहुंचते-पहुंचते टूट गई जिंदगी की डोर
इसके बाद परिजन रेखा देवी को लेकर सदर अस्पताल लखीसराय पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया.घटना का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि अस्पताल से शव घर पहुंचने के बाद भी परिजनों ने एक तांत्रिक को बुलाकर झाड़फूंक कराई. इस दृश्य को देखकर गांव के लोग भी हैरान रह गए.
तीन बेटों और एक बेटी को छोड़ गईं रेखा देवी
सूचना मिलने पर सूर्यगढ़ा थाना के अपर थानाध्यक्ष रविशंकर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया.रेखा देवी अपने पीछे तीन बेटों और एक बेटी को छोड़ गई हैं. उनकी असामयिक मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल है.
सर्पदंश में हर मिनट कीमती, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सर्पदंश की स्थिति में झाड़फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है. ऐसे मामलों में पीड़ित को बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए. समय पर एंटी-वेनम और वैज्ञानिक उपचार ही मरीज की जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है.
