श्रीश्री 1008 महारूद्र हनुमान महायज्ञ के सातवें दिन श्रद्धालुओं का लगा तांता

श्रीश्री 1008 महारूद्र हनुमान महायज्ञ के सातवें दिन श्रद्धालुओं का लगा तांता

मेदनीचौकी. माणिकपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गरीबनगर गांव में श्रीश्री 1008 महारूद्र हनुमान महायज्ञ के सातवें दिन यज्ञ समिति के अध्यक्ष संजीव कुमार की देखरेख में स्थानीय पंडित प्रेमचंद्र मिश्र के साथ आमंत्रित सभी अतीथी पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ हवन कार्य विधिवत सुबह और शाम शुरू हुआ. कलश उठाने वाली कन्याओं व पूजा में बैठे ग्रामीण पुरोहितों के साथ यज्ञ मंडप कि परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के बीच मंत्रोच्चार की धुन गुंजता रहा. शाम ढलते ही श्री धाम वृंदावन से पधारी पूज्य देवी श्री दीदी जी ने अपने रामकथा के आगे बढ़ाते हुए कहा कि राम कथा हमें मर्यादा में रहने की सीख प्रदान करती है. उन्होंने यज्ञ की महिमा का बखान करते हुए राम कथा में धनुष भंग यज्ञ के जरिये माता सीता का स्वयंवर का प्रसंग शुरू किया. जिसमें सभी राजाओं के आमंत्रण की बात कही. स्वंयवर में विश्वामित्र जी को भी आमंत्रित किये. विश्वामित्र जी राम जी लखन लाल जी को भी लेकर मिथिला पहुचे. जनक जी ने स्वागत सत्कार किये. राम जी लखन जी गुरु विश्वामित्र जी की आज्ञा से नगर भ्रमण को जब जाते है, तो मिथिला की सारी स्त्रियां राम जी को देखते ही रह जाती,लेकिन राघव जी नजर उठाके के नहीं देखते. मिथिला की नारियां भगवान से कहती है की राघव जी एक नजर हमें देख ले तो हम धन्य हो जाये. भ्रमण करके आते है गुरु देव को प्रणाम करते हैं . सीता जी सखियों से राम जी के गुणों का वर्णन सुनती है फिर सखियों के संग गौरी पूजन को जाती है. और गैरी मईया से कहती है की मेरे मन मे जो है आप जानती है, प्रणाम करके वापस आ जाती है. दीदी जी ने बताया जिस भी कन्या को सुंदर चरित्र वान अच्छा पति पाने के लिए गौरी मईया का पूजन करना चाहिए. धनुष यज्ञ की तैयारी की गयी अनेक राजा आये लेकिन धनुष को हिला भी न सके. तभी राम जी गुरु आज्ञा से धनुष को निमिष मात्र मे भंग कर दिये. सभी जो राजा आये थे आश्चर्य रह गये. दीदी जी ने बयाया तभी परशुराम जी का आना होता है अत्यंत क्रोध में परशुराम जी ने बोला ऐसा दुस्साहस किस ने किया. लखन लाल जी से उनका संवाद होता है. लखन लाल जी ने कहा प्रभु हमने न जाने बचपन मे ऐसी धनुष कितनी तोड़ी तब आप नहीं क्रोध किये. इस धनुष मे ऐसी क्या विशेषता है जो आप इतना क्रोध कर रहे है. परशुराम जी समझ गये कि ये कोई साधारण नहीं बल्कि शेष नाग के अवतारी है. राम जी के पास गए राम जी प्रणाम करते है परशुराम जी को और जनक जी अयोध्या में दशरथ को आमंत्रित किये की बारात लेकर आप आये. भगवान राम माता सीता जी का विवाह संपन्न होता है. सूर्यगढ़ा गरीब नगर के श्रोताओं ने जानकी मईया के विवाह उत्सव आनंद के साथ मनाये और रासलीला का भी श्रद्धालुओं ने आनंद उठाया. वहीं श्रीराम कथा के मंच में विधायिका श्रीमती अनीता जी का आगमन हुआ. दीदी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया. जय जय कार की गूंज सुनने को दिखी. यज्ञ में ग्रामीण कार्यकर्ताओं व प्रशासन की सक्रियता दिखी. मनोरंजन के सभी आकर्षक आइटमों व मिठाई-चाट की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही.

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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