सूर्यगढ़ा (लखीसराय) से राजेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
Rishi Dham: लखीसराय जिले की पहाड़ियों, झरनों और घने जंगलों के बीच बसा एक ऐसा पौराणिक धाम है, जिसका संबंध सीधे रामायण काल से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि यहीं महर्षि श्रृंगी ने राजा दशरथ के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था, जिसके फलस्वरूप भगवान राम सहित चारों भाइयों का जन्म हुआ. यही नहीं, स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का मुंडन संस्कार भी इसी पवित्र स्थल पर संपन्न हुआ था. आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम बना श्रृंगी ऋषि धाम आज भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.
जहां पूरी हुई थी राजा दशरथ की संतान प्राप्ति की कामना
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अयोध्या के महाराज दशरथ संतान सुख से वंचित थे. तब उन्होंने महर्षि श्रृंगी की शरण ली. कहा जाता है कि महर्षि ने इसी स्थान पर विशेष पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था. यज्ञ से प्रसन्न होकर अग्निदेव दिव्य खीर लेकर प्रकट हुए थे. राजा दशरथ ने वह खीर अपनी रानियों को दी, जिसके फलस्वरूप भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ.
भगवान राम और चारों भाइयों का हुआ था मुंडन संस्कार
स्थानीय परंपराओं और जनश्रुतियों के अनुसार भगवान राम सहित चारों भाइयों का मुंडन संस्कार भी श्रृंगी ऋषि धाम में ही संपन्न हुआ था. इसी वजह से आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने यहां पहुंचते हैं. माना जाता है कि यहां किए गए धार्मिक संस्कार विशेष फलदायी होते हैं.
प्राचीन शिवलिंग और सीता कुंड की अनोखी मान्यता
धाम परिसर में स्थित प्राचीन शिवलिंग को अत्यंत चमत्कारी माना जाता है. श्रद्धालु वर्षभर यहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं. वहीं सीता कुंड को लेकर मान्यता है कि इसके जल में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों में लाभ मिलता है. प्राकृतिक झरनों से घिरा यह क्षेत्र आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है.
मोरवे डैम और झरनों का मनमोहक नजारा
श्रृंगी ऋषि धाम सिर्फ धार्मिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी प्रसिद्ध है. पहाड़ियों की गोद में स्थित मोरवे डैम, हरियाली से ढकी वादियां और कल-कल बहते झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. बरसात के मौसम में यहां का दृश्य किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं लगता.
सावन और महाशिवरात्रि में उमड़ता है आस्था का सैलाब
सावन, कार्तिक, अगहन, श्रीपंचमी और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. सामान्य दिनों में भी प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक आयोजनों के दौरान पूरा इलाका भक्तिमय माहौल में डूब जाता है.
विकास और सुविधाओं की दरकार
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बावजूद धाम में बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जाती है. जर्जर सड़क, सीमित पेयजल व्यवस्था, शौचालय और ठहरने की पर्याप्त सुविधा नहीं होने से लोगों को परेशानी होती है. स्थानीय लोग यहां पुलिस चौकी, धर्मशाला और पर्यटन सुविधाओं के विकास की मांग कर रहे हैं.
एक नजर में श्रृंगी ऋषि धाम
स्थान – बुधौली बनकर पंचायत, सूर्यगढ़ा प्रखंड, लखीसराय
मुख्यालय से दूरी – लगभग 23 किलोमीटर
पौराणिक महत्व – राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ का स्थल
विशेष मान्यता – भगवान राम और चारों भाइयों का मुंडन संस्कार
मुख्य आकर्षण – प्राचीन शिवलिंग, सीता कुंड, प्राकृतिक झरना और मोरवे डैम
दर्शन समय – सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक
