मोकामा-मुंगेर फोरलेन के लिए जमीन अधिग्रहण पर किसानों का गुस्सा, 500 हस्ताक्षर वाला ज्ञापन डीएम को सौंपा

लखीसराय में मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण का किसानों और व्यवसायियों ने कड़ा विरोध किया है. अलाइनमेंट, मुआवजे की दर और वर्गीकरण को लेकर उठाई गई हैं प्रमुख मांगें.

लखीसराय : एनएचएआई की निर्माणाधीन मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर लखीसराय में किसानों और व्यवसायियों का विरोध तेज हो गया है. खैरी, दामोदरपुर और औरैया मौजा के किसानों, व्यवसायियों और रैयतों ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी को 500 हस्ताक्षरित ज्ञापनों का पुलिंदा सौंपा.

पूर्व नगर परिषद वाइस चेयरमैन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद कुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा. यहां जिलाधिकारी और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के समक्ष किसानों ने अपनी मांगें रखीं.

किसानों का आरोप- घनी आबादी से क्यों तय किया गया अलाइनमेंट?

प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि फोरलेन का अलाइनमेंट घनी आबादी, महंगे शहरी इलाके और मुख्य बाजार की ओर से तय किया गया है. किसानों का कहना है कि इसके महज करीब 500 मीटर की दूरी पर खाली और अपेक्षाकृत सस्ती जमीन उपलब्ध है, फिर भी सड़क का रूट आबादी वाले क्षेत्र से तय किया गया.

किसानों और व्यवसायियों के अनुसार, इससे सैकड़ों परिवारों के विस्थापित होने के साथ कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के प्रभावित होने और बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है. व्यापारियों का कहना है कि कई लोगों ने कारोबार के लिए बैंकों से कर्ज लिया है. प्रतिष्ठान और जमीन अधिग्रहित होने की स्थिति में कर्ज चुकाना उनके लिए मुश्किल हो सकता है.

मुआवजे की दर पर भी उठाये सवाल

किसानों ने भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे की दर को लेकर भी आपत्ति जतायी है. उनका आरोप है कि 2013 के सरकारी प्रावधानों के अनुसार नये सर्किल रेट के आधार पर चार गुना मुआवजे का प्रावधान होने के बावजूद उन्हें पुराने सर्किल रेट के आधार पर डेढ़ गुना मुआवजे के नोटिस दिये जा रहे हैं.

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि आवासीय और व्यावसायिक जमीनों को कृषि भूमि की श्रेणी में दर्ज कर मूल्यांकन कम किया जा रहा है. किसानों ने जमीन और मकानों के सही वर्गीकरण की मांग की है.

भूमि अधिग्रहण विवाद में किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों और व्यवसायियों ने प्रशासन के सामने मुख्य रूप से ये मांगें रखीं:

  • फोरलेन के अलाइनमेंट में तत्काल संशोधन किया जाये.
  • सड़क को खाली और अपेक्षाकृत सस्ती जमीन से गुजारने पर विचार हो.
  • एडीएम की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की जाये.
  • भूमि और मकानों का सही वर्गीकरण कर नये सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा तय किया जाये.
  • पुनर्वासन नीति 2013 और एनएचएआई गजट के प्रावधानों के तहत प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्स्थापन पैकेज दिया जाये.
  • प्रभावित भू-स्वामियों को चार गुना मुआवजा दिया जाये.

डीएम ने जांच कमेटी का भरोसा दिया

किसानों और व्यवसायियों की ओर से सौंपे गये ज्ञापन का जिलाधिकारी और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने संज्ञान लिया. अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को सकारात्मक आश्वासन देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी गठित करने का भरोसा दिया.

वहीं, कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद किसानों और व्यवसायियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र किया जायेगा.

ज्ञापन सौंपने वालों में प्रदीप सावन, गणिता कुमारी, अशर्फी यादव, अनिल यादव, संजय कुमार, अनिल कुमार समेत अन्य लोग शामिल थे.

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By राजेश कुमार

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