लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम में श्रावणी मेले के दौरान हुए भीषण हादसे ने जिला प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों की पोल पूरी तरह से खोलकर रख दी है. इस दर्दनाक घटना में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत और 22 अन्य के घायल होने के बाद प्रशासनिक महकमे की भारी कार्यहीनता उजागर हुई है. हैरानी की बात यह रही कि जब मंदिर परिसर में हालात बेकाबू हो रहे थे, तब मौके पर सुरक्षा संभालने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था. इस घोर लापरवाही को लेकर अब केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल (भाजपा और जदयू) के नेताओं ने भी अपने ही तंत्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
कागजों तक सीमित रह गया सुरक्षा का पूरा प्लान
श्रावणी मेला शुरू होने से पहले अशोक धाम में जिला प्रशासन ने कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकें कर एक विस्तृत सुरक्षा प्लान तैयार किया था. इन बैठकों के बाद बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अधिकारियों ने यह दावा किया था कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी, भारी संख्या में पुलिस बल और एसएसबी (SSB) के जवानों की तैनाती की जाएगी. प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम का भरोसा दिलाया था, लेकिन सावन की सोमवारी पर उमड़ी भीड़ के बीच हुए इस बड़े हादसे ने यह साबित कर दिया कि सुरक्षा के वे तमाम दावे महज कागजों तक ही सीमित थे.
चीख-पुकार के बीच मूकदर्शक बनी रही पुलिस, नदारद रहे दंडाधिकारी
प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों ने प्रशासनिक लापरवाही की एक बेहद खौफनाक तस्वीर पेश की है.
जानकारी के अनुसार, जब अशोक धाम परिसर में भगदड़ मच रही थी और श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस महत्वपूर्ण समय पर घटनास्थल पर एक भी दंडाधिकारी मौजूद नहीं था. वहां तैनात एसएसबी और पुलिस के कुछ जवान भी भीड़ के आगे बेबस और मूकदर्शक बने रहे. स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो जाने के बावजूद प्रशासनिक अमला मौके से नदारद रहा. कई दंडाधिकारी तो घटना के घंटों बीत जाने के बाद घटनास्थल पर पहुंचे, जिससे आम लोगों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है.
अस्पताल की अव्यवस्था देख भड़के भाजपा जिलाध्यक्ष, सत्ता पक्ष में भी उबाल
प्रशासनिक विफलता की इस हद को देखकर सत्ता पक्ष के नेताओं का भी सब्र टूट गया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के स्थानीय नेताओं ने इसे सीधे तौर पर घोर प्रशासनिक विफलता करार देते हुए अपनी ही सरकार के उन दोषी पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, जिनकी लापरवाही से यह हादसा हुआ. हादसे के बाद जब भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक कुमार घायलों का हाल जानने सदर अस्पताल पहुंचे, तो वहां की बदहाल व्यवस्था देखकर उनका गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और इलाज की लचर व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के सामने जमकर अपनी नाराजगी जाहिर की.
विपक्ष ने की उच्चस्तरीय जांच और मुआवजे की मांग
सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन को आड़े हाथों लिया है. विपक्षी दलों के नेताओं ने राज्य सरकार से इस पूरी घटना की एक उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने सभी मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और इस भीषण त्रासदी के लिए जिम्मेदार उन सभी लापरवाह अधिकारियों पर अविलंब सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है.
