रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में जैविक खाद अपनाने पर जोर, सभी प्रखंडों में शुरू होंगे किसान शिविर
लखीसराय से अजीत सिंह की रिपोर्ट:
Lakhisarai news: भारत सरकार के निर्देश के बाद जिले में रासायनिक खाद के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से कम कर जैविक खाद को बढ़ावा देने की पहल शुरू कर दी गई है. इसको लेकर कृषि विभाग द्वारा किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. जिला कृषि पदाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि सभी प्रखंडों में किसान शिविर आयोजित कर किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत सभी एटीएम (कृषि तकनीकी प्रबंधक) एवं बीटीएम (प्रखंड तकनीकी प्रबंधक) को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है. कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर शिविर लगाएंगी और किसानों को जैविक खाद के उपयोग, उसके लाभ तथा निर्माण की विधि की जानकारी देंगी. इसके साथ ही मोटे अनाजों की खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा.
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हुई है. होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के उर्वरक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है. वहीं यूरिया निर्माण में उपयोग होने वाली गैस की कीमत बढ़ने से उत्पादन पर भी असर पड़ा है. ऐसे में केंद्र सरकार जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रासायनिक खाद के प्रयोग से फसलों की पैदावार अधिक होती है, लेकिन लंबे समय तक इसके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. वहीं जैविक खाद से तैयार फसलें स्वास्थ्य के लिए बेहतर मानी जाती हैं और बाजार में इनकी मांग एवं कीमत भी अधिक मिलती है.
जिले में मडुआ, ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों की जैविक खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. कई किसान पहले से जैविक पद्धति से खेती कर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं. कृषि विभाग का मानना है कि जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता को भी संरक्षित करेगी.
जिला कृषि पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि भविष्य में रासायनिक खाद की उपलब्धता और प्रभावित हो सकती है. ऐसे में किसानों को समय रहते जैविक खेती की ओर बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप जिले के सभी पंचायतों तक जागरूकता अभियान पहुंचाया जाएगा.
