लखीसराय. जिले में गंगा और हरोहर नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. बड़हिया में गंगा और सदर प्रखंड क्षेत्र में हरोहर नदी का पानी अभी खतरे के निशान से नीचे बताया जा रहा है, लेकिन खेतों में पानी फैलने से मक्का और धान की फसल प्रभावित होने लगी है. साबिकपुर, रेहुआ, दामोदरपुर, बभनगांमा समेत कई गांवों में सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न होने की सूचना है.
खेतों में घुसा नदी का पानी, फसल को नुकसान
हरोहर नदी के किनारे बसे गांवों में नदी का पानी खेतों तक पहुंच गया है. इससे मक्का और धान की खड़ी फसल डूबने लगी है. वहीं दियारा क्षेत्र के पथुआ, कन्हरपुर और वलीपुर सहित अन्य गांवों में पानी फैलने से पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट भी खड़ा हो गया है.
दियारा इलाकों में बढ़ी चिंता
निचले इलाकों में पानी बढ़ने से ग्रामीणों को फसल के साथ-साथ पशुधन की चिंता सताने लगी है. खेतों में पानी भर जाने के कारण हरा चारा प्रभावित हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो और अधिक कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में आ सकती है.
यूपी में गंगा के उफान का बिहार पर असर
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर बिहार की नदियों पर भी पड़ रहा है. गंगा और सहायक नदियों का पानी बढ़ने से निचले इलाकों में जल फैलाव बढ़ रहा है. प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
प्रशासन ने बताया स्थिति नियंत्रण में
एसडीओ प्रभाकर कुमार ने बताया कि कुछ स्थानों पर गंगा और सहायक नदियों का पानी फैला है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है. उन्होंने कहा कि संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं. जरूरत पड़ने पर चारा, नाव, सूखा राशन और सामुदायिक भोजनालय की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी.
फसल नुकसान पर किसानों को कैसे मिल सकती है सरकारी सहायता
बिहार राज्य फसल सहायता योजना क्या है
बिहार सरकार की बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत पात्र किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता दी जाती है. यह योजना सहकारिता विभाग के माध्यम से संचालित होती है. किसानों को आवेदन करने के लिए कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर किसान पंजीकरण कराना जरूरी है. इसके बाद पात्र किसान सहकारिता विभाग के ई-सहकारी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.
रैयत और गैर-रैयत किसान भी कर सकते हैं आवेदन
आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार रैयत किसान के साथ गैर-रैयत किसान और आंशिक रूप से रैयत एवं गैर-रैयत किसान भी योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं. आवेदन में बोई गई फसल और क्षेत्र से संबंधित जानकारी देना अनिवार्य है.
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और जानकारी
किसानों को आवेदन के दौरान किसान पंजीकरण संख्या, बोई गई फसल, रकबा तथा भूमि से संबंधित विवरण देना होता है. खाता संख्या, खेसरा संख्या, थाना संख्या और कंप्यूटरीकृत जमाबंदी संख्या अथवा बोए गए कुल रकबे की जानकारी मांगी जाती है. सभी श्रेणी के किसानों को निर्धारित प्रारूप में स्व-घोषणा पत्र भी अपलोड करना होता है. गैर-रैयत और आंशिक रैयत किसानों के स्व-घोषणा पत्र पर संबंधित स्थानीय प्रतिनिधियों और कृषि समन्वयक के प्रतिहस्ताक्षर की व्यवस्था है.
जियो-कोऑर्डिनेट देना भी जरूरी
आवेदन के समय किसान को एंड्रॉयड मोबाइल के माध्यम से संबंधित खेत की जियो-कोऑर्डिनेट जानकारी देना अनिवार्य है. गलत या भ्रामक जानकारी देने पर आवेदन अस्वीकृत माना जा सकता है.
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें
किसान पहले कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर अपना किसान पंजीकरण कराएं. पंजीकरण संख्या मिलने के बाद सहकारिता विभाग के ई-सहकारी पोर्टल पर बिहार राज्य फसल सहायता योजना के आवेदन विकल्प के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है. आधिकारिक पोर्टल पर वर्तमान में फसल सहायता योजना से संबंधित आवेदन और रिपोर्ट उपलब्ध हैं.
किसानों को नुकसान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सलाह
बाढ़ से फसल प्रभावित होने की स्थिति में किसान खेत, फसल और जलभराव की तस्वीरें तथा उपलब्ध भूमि और फसल से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें. साथ ही स्थानीय कृषि पदाधिकारी, पंचायत स्तर के कर्मियों और अंचल प्रशासन को नुकसान की जानकारी दें, ताकि सरकारी स्तर पर होने वाले सत्यापन में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा सके.
