लखीसराय. जिले में बाढ़ के पानी से फसलों को हुए नुकसान का आकलन शुरू कर दिया गया है. कृषि विभाग ने कृषि समन्वयकों और कृषि सलाहकारों की टीम को फील्ड में उतार दिया है. फिलहाल पानी में डूबी फसलों को देखते हुए संभावित नुकसान का आकलन किया जा रहा है. विभाग की टीम अलग-अलग प्रखंडों में खेतों का जायजा लेकर फसल क्षति की स्थिति दर्ज कर रही है. पानी उतरने के बाद फाइनल आकलन किया जाएगा.
पिपरिया में मकई और सब्जी की फसल को सबसे अधिक नुकसान की आशंका
जानकारी के अनुसार रामगढ़ चौक, हलसी और चानन प्रखंड में बाढ़ से फसल को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचा है. वहीं पिपरिया प्रखंड में सबसे अधिक नुकसान की संभावना जतायी जा रही है. यहां मकई और सब्जी की फसल लंबे समय से पानी में डूबी होने के कारण बर्बाद होने की आशंका है.
बड़हिया के टाल क्षेत्र में पानी उतरने के समय पर टिकी दलहन की उम्मीद
बड़हिया प्रखंड में भी बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है. हालांकि टाल क्षेत्र में बाढ़ के पानी को लेकर स्थिति कुछ अलग है. यदि दलहन की बुआई से 15 से 20 दिन पहले टाल क्षेत्र से पानी निकल जाता है तो यहां दलहन की अच्छी फसल होने की संभावना रहती है. ऐसे में किसानों की नजर पानी निकलने के समय पर टिकी हुई है.
सूर्यगढ़ा के दक्षिणी इलाके में धान और सब्जी को भारी नुकसान
सूर्यगढ़ा प्रखंड के दक्षिणी इलाके में बाढ़ से फसल को सबसे अधिक नुकसान का आकलन किया जा रहा है. यहां धान के साथ-साथ सब्जी की खेती भी प्रभावित हुई है. खेतों में पानी जमा रहने के कारण फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गयी है. कृषि विभाग की टीम इन क्षेत्रों में फसल क्षति की स्थिति का जायजा ले रही है.
सदर प्रखंड के तीन क्षेत्रों में भी चल रहा सर्वे
लखीसराय सदर प्रखंड के अमहरा, साबिकपुर और गढ़ी बिशनपुर पंचायत के रेहुआ गांव में भी फसल नुकसान का आकलन किया जा रहा है. यहां धान, मकई और सब्जी की फसलों को हुए नुकसान की स्थिति देखी जा रही है. पानी में डूबी फसलों के कारण फिलहाल संभावित क्षति का ही आकलन हो रहा है.
पानी उतरने के बाद होगा फाइनल आकलन
जिला कृषि पदाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि अभी कई जगहों पर फसल पानी में डूबी हुई है. इसलिए फिलहाल संभावित नुकसान का ही आकलन किया जा रहा है. बाढ़ का पानी पूरी तरह हटने के बाद पंचायतवार यह आकलन किया जाएगा कि किस पंचायत में किस फसल को कितना नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि अभी पानी अधिक होने के कारण आकलन टीम को यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पा रहा है कि किस खेत में कौन सी फसल लगी है. पानी उतरने के बाद खेतों की स्थिति स्पष्ट होने पर फसलवार और क्षेत्रवार नुकसान का अंतिम आकलन किया जाएगा.
