लखीसराय अशोक धाम हादसा: 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत का जिम्मेदार कौन? मंदिर प्रबंधन या प्रशासनिक लापरवाही?

लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर भगदड़ में सात महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई. व्यवस्था की नाकामी और भीड़ नियंत्रण में विफलता को लेकर मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं. जानिए इस हृदयविदारक हादसे की पूरी वजह.

लखीसराय स्थित प्रसिद्ध श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर (अशोक धाम) में सावन की तीसरी सोमवारी को आस्था का पर्व अचानक चीख-पुकार में बदल गया. मंदिर परिसर में मची भीषण भगदड़ में सात महिला श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं. घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और प्रशासनिक महकमे में भारी हड़कंप मच गया है. इस हृदयविदारक हादसे के बाद अब हर तरफ से यही सवाल उठ रहा है कि आखिर इस अनहोनी का असली जिम्मेदार कौन है—मंदिर प्रबंधन की घोर लापरवाही या फिर स्थानीय प्रशासन की उदासीनता.

मंदिर प्रबंधन की कार्यशैली और भीड़ नियंत्रण पर सवाल

सावन की सोमवारी के अवसर पर अशोक धाम में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु जल चढ़ाने पहुंचते हैं. भीड़ के इस दबाव का पहले से अनुमान होने के बावजूद मंदिर परिसर के भीतर भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम सिरे से नदारद थे. प्रवेश और निकास द्वारों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को सुव्यवस्थित तरीके से संभालने के लिए कोई भी कतार प्रणाली नहीं बनाई गई थी. इसके साथ ही निकास मार्गों पर संकीर्णता और अचानक उमड़ी बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने में मंदिर समिति के स्वयंसेवक पूरी तरह से विफल साबित हुए. भीड़ के दबाव के कारण बैरिकेडिंग तक टूट गई और हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए.

प्रशासनिक उदासीनता और सुरक्षा में बड़ी चूक

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय जिला व पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर उंगलियां उठ रही हैं. जब प्रशासन को पहले से यह मालूम था कि तीसरी सोमवारी के दिन मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ेगा, तो सुरक्षा के मानकों को इतना ढीला क्यों छोड़ दिया गया. भीड़ का सही आकलन किए बिना परिसर में पर्याप्त संख्या में पुलिस बलों की तैनाती नहीं की गई थी. इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए मंदिर परिसर के आसपास एंबुलेंस और त्वरित चिकित्सा दल की उपलब्धता भी बेहद लचर स्थिति में थी, जिसका खामियाजा हादसे के बाद घायलों को भुगतना पड़ा.

व्यवस्था की नाकामी, तय होनी बाकी है जवाबदेही

हादसे के बाद अब प्रशासन और मंदिर प्रबंधन एक-दूसरे पर दोषारोपण करते नजर आ सकते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि यह हादसा व्यवस्था की नाकामी और पूर्व तैयारियों के अभाव का सीधा परिणाम है. रिपोर्ट के अनुसार, यदि समय रहते भीड़ प्रबंधन का एक उचित ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित ढंग से प्रवेश दिया जाता, तो सात बेकसूर महिलाओं की जिंदगी बचाई जा सकती थी. फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के बाद ही दोषियों की असल जवाबदेही सामने आ सकेगी.


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By राजेश कुमार

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