पूरे देश को रोशन करेगी बिहार की यह महापरियोजना, पर कजरा के गांवों को अब तक क्या मिला? रोजगार और बिजली पर उठ खड़े हुए सवाल

बिहार में एक विशाल सौर ऊर्जा परियोजना आकार ले रही है, लेकिन स्थानीय ग्रामीण अभी भी बिजली की गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं. "चिराग तले अंधेरा" की स्थिति पर प्रकाश डालती यह रिपोर्ट विकास की उम्मीदों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को दर्शाती है.

लखीसराय, पीरी बाजार. कजरा क्षेत्र में देश की बड़ी सोलर प्लस बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना आकार ले रही है, लेकिन परियोजना क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीण आज भी बिजली की समस्याओं से जूझ रहे हैं. एक ओर अत्याधुनिक ऊर्जा परियोजना का निर्माण तेजी से चल रहा है, वहीं दूसरी ओर कई गांवों में अघोषित बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या बनी हुई है. स्थानीय लोग इसे 'चिराग तले अंधेरा' जैसी स्थिति बता रहे हैं.

185 मेगावाट सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज परियोजना का निर्माण

कजरा क्षेत्र में 185 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना और 282 मेगावाट-आवर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) की परियोजना का निर्माण जारी है. परियोजना के विस्तार के बाद इसकी कुल भंडारण क्षमता 495 मेगावाट-आवर तक पहुंचने की बात कही जा रही है. परियोजना से बिजली खरीद को लेकर बीएसपीजीसीएल की ओर से पीपीए किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. इतनी बड़ी ऊर्जा परियोजना के कारण कजरा और आसपास के क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने की उम्मीद है.

परियोजना से जगी थी विकास की उम्मीद

परियोजना की शुरुआत के साथ ही कजरा, पीरी बाजार और आसपास के गांवों के लोगों में विकास की उम्मीद जगी थी. ग्रामीणों को भरोसा था कि जिस क्षेत्र में इतनी बड़ी ऊर्जा परियोजना स्थापित हो रही है, वहां बिजली व्यवस्था सबसे पहले मजबूत होगी. लोगों को यह भी उम्मीद थी कि परियोजना के कारण क्षेत्र में सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा.

गांवों में अब भी लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसका अपेक्षित लाभ स्थानीय स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है. कई गांवों में शाम के समय वोल्टेज काफी कम हो जाता है.

एक ग्रामीण ने कहा कि कजरा में इतना बड़ा ऊर्जा प्लांट लगना क्षेत्र के लिए गर्व की बात है और इससे पूरे देश में इलाके का नाम होगा. लेकिन ग्रामीणों के घरों में शाम होते ही वोल्टेज कम हो जाता है और पंखे तक ठीक तरीके से नहीं चल पाते.

रोजगार की उम्मीद भी अधूरी

परियोजना शुरू होने के समय स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की भी उम्मीद थी. ग्रामीणों को लगा था कि निर्माण से लेकर परियोजना के संचालन तक स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलेगी. स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी भी रोजगार और स्थानीय भागीदारी को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है. युवाओं को उम्मीद है कि परियोजना के विस्तार और आगे के कार्यों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी.

सरकार और कंपनी से प्रत्यक्ष लाभ स्पष्ट करने की मांग

ग्रामीणों ने सरकार और परियोजना से जुड़ी कंपनी से स्पष्ट करने की मांग की है कि इस मेगा प्रोजेक्ट से कजरा और आसपास के गांवों को क्या प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा. लोगों की मांग है कि स्थानीय स्तर पर बिजली व्यवस्था को मजबूत किया जाए और रोजगार के अवसरों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिले.

गांवों तक पहुंचे विकास और ऊर्जा की रोशनी

स्थानीय लोगों का कहना है कि कजरा की यह महत्वाकांक्षी ऊर्जा परियोजना तभी सही मायने में सफल मानी जाएगी, जब इसके विकास का लाभ आसपास के गांवों तक भी पहुंचे. ग्रामीणों का कहना है कि कजरा के खेतों से निकलने वाली ऊर्जा और विकास की रोशनी आसपास के गांवों के घरों तक पहुंचनी चाहिए. स्थानीय बिजली व्यवस्था मजबूत होने और युवाओं को रोजगार मिलने से ही क्षेत्र के लोग इस बड़ी परियोजना से सीधे तौर पर जुड़ सकेंगे.


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लेखक के बारे में

By रवि राज

रवि राज प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. पीरीबाजार (लखीसराय) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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