हलसी (लखीसराय) से केशव कुमार की रिपोर्ट. प्रखंड मुख्यालय के गौरा गांव में आयोजित ग्यारह दिवसीय श्री श्री 1008 रुद्र महायज्ञ अब अपने चरम पर है. पंचकुंडीय इस भव्य आयोजन में श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ रहा है कि पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर हो गया है. मंडप परिक्रमा के लिए रोजाना हजारों की संख्या में नर-नारी और बच्चे यज्ञ स्थल पहुंच रहे हैं.
काम से पहले ‘राम’: परिक्रमा कर शुरू होती है दिनचर्या
महायज्ञ को लेकर क्षेत्र में अद्भुत धार्मिक माहौल बना हुआ है. स्थानीय ग्रामीण, चाहे वे किसान हों या मजदूर, अपने दैनिक कार्यों पर निकलने से पहले यज्ञ मंडप की परिक्रमा करना और माथा टेकना नहीं भूलते. सभी समुदायों के लोग इस धार्मिक गतिविधि में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द का भी संदेश जा रहा है.
नेताओं और श्रद्धालुओं का लगा जमावड़ा
यज्ञ के दसवें दिन सूर्यगढ़ा के पूर्व विधायक प्रहलाद यादव सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने यज्ञ स्थल पहुंचकर दर्शन किए और आशीर्वाद लिया. शाम ढलते ही आचार्य के नेतृत्व में होने वाली दिव्य आरती में स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ जुट रही है.
मंत्रोच्चार और रासलीला से गूंज रहा है आकाश
यज्ञ स्थल पर दिन-रात वैदिक मंत्रों और धार्मिक गीतों का उच्चारण हो रहा है. श्रद्धालुओं के मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए विशेष आयोजन किए गए हैं:
- दोपहर: रासलीला का मंचन.
- रात्रि: भव्य रामलीला और धार्मिक प्रवचन.
- अन्य: कबीर पंथ के विशेष कार्यक्रम.
आचार्य का संदेश: परिक्रमा से मिलता है अश्वमेध यज्ञ का फल
महायज्ञ के आचार्य सुनील पांडे ने शास्त्रोक्त महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यज्ञ स्थल पर समस्त देवी-देवता और तीर्थ विराजमान होते हैं. उन्होंने कहा, “यं यं चिंतयेत कामं, तं तं प्राप्नोति निश्चितम्” अर्थात सच्ची श्रद्धा से की गई परिक्रमा मनोवांछित फल देती है. आचार्य ने श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु के निमित्त कम से कम चार बार और क्षमतानुसार 108 या 1008 बार ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करते हुए परिक्रमा करने की सलाह दी. उन्होंने यह भी बताया कि मंडप की एक परिक्रमा अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी होती है.
मीना बाजार और भंडारे की उत्तम व्यवस्था
यज्ञ स्थल पर केवल अध्यात्म ही नहीं, बल्कि मेलों जैसा उत्साह भी है. बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले लगाए गए हैं, वहीं महिलाओं के लिए मीना बाजार और श्रृंगार की दुकानें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रहने और खाने-पीने के लिए निशुल्क भंडारे का संचालन किया जा रहा है, जिससे सेवा और समर्पण का भाव स्पष्ट झलक रहा है.
