अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बिहार योग विद्यालय का संदेश, दयालुता को बनाएं जीवन का आधार

International Yoga Day 2026: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 को बिहार योग विद्यालय ने “दयालुता का वर्ष” समर्पित किया है. योग के माध्यम से करुणा, संतोष और मानवीय मूल्यों को जीवन में उतारने का संदेश दिया गया है.

सूर्यगढ़ा (लखीसराय) से राजेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट:

International Yoga Day 2026: बिहार योग विद्यालय, मुंगेर ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर लोगों से दयालुता, करुणा और संतोष जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया है. विद्यालय ने इस वर्ष को “दयालुता का वर्ष” के रूप में समर्पित करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दिया है.

यह जानकारी मुंगेरी योग विश्वविद्यालय की विशेष प्रतिनिधि एवं राष्ट्रीय कथावाचक उमाशंकर व्यास द्वारा उपलब्ध कराई गई. जारी संदेश में कहा गया है कि वर्तमान समय में समाज को दयालुता, करुणा और संतोष जैसे गुणों की पहले से अधिक आवश्यकता है.

दयालुता से मजबूत होगा सामाजिक सौहार्द

संदेश में कहा गया है कि दयालुता केवल व्यक्ति के व्यवहार को सकारात्मक नहीं बनाती, बल्कि समाज में सौहार्द, शांति और स्वीकार्यता की भावना को भी मजबूत करती है. बिहार योग विद्यालय ने अपने साधकों और आम लोगों से आग्रह किया है कि वे अपने संबंधों और दैनिक गतिविधियों में दयालुता को आधार बनाकर जीवन को अधिक सार्थक बनाएं.

संतोष से मिलता है मानसिक संतुलन

विद्यालय के अनुसार संतोष का भाव व्यक्ति को अभावों के बजाय उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करना सिखाता है. इससे मानसिक शांति, आत्मविश्वास और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है. संतोष व्यक्ति को तनावमुक्त और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है.

योग से विकसित होते हैं मानवीय मूल्य

संदेश में कहा गया है कि योग, प्राणायाम, ध्यान और विश्रांति जैसी विधियां शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाती हैं. नियमित योग अभ्यास से व्यक्ति के भीतर आत्मिक संतुलन, धैर्य, करुणा और सकारात्मक सोच का विकास होता है.

विद्यालय ने कहा कि दया और करुणा की छोटी-छोटी अभिव्यक्तियां भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं. वहीं संतोष को जीवन का सच्चा धन बताते हुए लोगों से योग के माध्यम से पूर्णता और आत्मिक शांति प्राप्त करने का आह्वान किया गया.

योग को जीवनशैली बनाने की अपील

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बिहार योग विद्यालय ने सभी लोगों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने और दयालुता व संतोष के मूल्यों को व्यवहार में उतारने की अपील की है. विद्यालय का मानना है कि यही मूल्य विकसित और संवेदनशील समाज की नींव बन सकते हैं.

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By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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