सनातन सांस्कृतिक संघ के बिहार कार्यालय का शुभारंभ

सनातन सांस्कृतिक संघ के बिहार कार्यालय का शुभारंभ

संघ के ‘टोटल विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम’ की रखी गयी रूपरेखा

प्राकृतिक खेती से को बढ़ावा दिये जाने का लिया संकल्प

लखीसराय. सनातन सांस्कृतिक संघ द्वारा ग्रामीण भारत के उत्थान व सांस्कृतिक जड़ों को पुनर्जीवित करने के लिए एक बड़ी पहल की शुरुआत की गयी है. रविवार को एनएच 80 स्थित बालगुदर गांव के अशोक धाम मोड़ के समीप बिहार कार्यालय का शुभारंभ किया गया. मौके पर संघ के राष्ट्रीय संयोजक सह बिहार प्रभारी नीतिश कुमार सिंह ने बताया कि संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिप्रिया भार्गव हैं. यह पावन अवसर केवल एक उद्घाटन समारोह नहीं है, बल्कि एक संकल्प का आरंभ है. संघ ने ‘टोटल विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम’ की रूपरेखा पेश करते हुए ””जहरीली खेती”” के खिलाफ एक व्यापक जन आंदोलन का शंखनाद किया है. कार्यक्रम के दौरान देश की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी. वक्ताओं ने कहा कि एक समय भारत ”सोने की चिड़िया” था, जहां जल अमृत समान व हवा जीवनदायिनी थी. आज आधुनिकता की दौड़ में हमारी खेती जहर (रसायनों) की ओर बढ़ रही है. भूमि बंजर हो रही है व पानी विषैला हो रहा है. इसका सीधा असर हमारे भोजन पर पड़ रहा है. आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट खड़ा हो गया है. संघ ने समाधान के रूप में प्राकृतिक खेती व जीरो कॉस्ट (शून्य लागत) खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया. इसके तहत लोगों को रसायानयुक्त खेती छोड़कर प्रकृति के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित व प्रशिक्षित किया जायेगा. संघ का मानना है कि इस पद्धति को अपनाकर हम न केवल अपनी भूमि को पुनर्जीवित कर सकते हैं, बल्कि वातावरण को भी संतुलित कर सकते हैं. कार्यक्रम के दौरन ”आशमा” के तीन स्तंभों पर विकास का मॉडल को प्रस्तुत किया गया, जिसमें आ – आर्थिक व आत्मिक उन्नति, श – शारीरिक सशक्तिकरण, मा-मानसिक संतुलन व विकास की बात कही गयी. जिनके माध्यम से गांवों में आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य व सामाजिक समरसता फैलाने का लक्ष्य है. कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती के महत्व को रेखांकित करते हुए विद्वान कृषि विज्ञानी विनोद सचान व राष्ट्रीय सलाहकार सुभाष पालेकर के योगदान की चर्चा की गयी. साथ ही कहा गया कि संघ का मानना है कि खेती केवल उत्पादन नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ एक संतुलित संबंध है. गाय का गोबर व गोमूत्र ही खेत की असली उर्वरता हैं. ”पंचमहाभूत” (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व आकाश) की रक्षा को संघ ने अपना मुख्य लक्ष्य बताया. वहीं स्पष्ट किया गया कि सनातन सांस्कृतिक संघ का मूल उद्देश्य वैदिक, जैन, बौद्ध और सिख परंपराओं को एक मंच पर लाना है. संघ जाति-वर्ण के भेदभाव से ऊपर उठकर शांति, श्रद्धा व शौर्य के मूल्यों के आधार पर समाज और राष्ट्र के निर्माण में जुटा है. ””वसुधैव कुटुंबकम”” की भावना के साथ मातृशक्ति व युवा शक्ति के उत्थान को प्राथमिकता दी जा रही है. उद्घाटन सत्र के समापन पर इसे केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन करार दिया गया. उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से अपने गांव, संस्कृति, धरती व धर्म की रक्षा का संकल्प लिया, ताकि भारत को पुनः उसके स्वर्णिम युग की ओर ले जाया जा सके.

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