लखीसराय से अजीत सिंह की रिपोर्ट :
लखीसराय बायपास स्थित पुल में दरार आने और नो एंट्री लागू होने के बाद प्रशासन के सामने भारी वाहनों के आवागमन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. पहले सभी बड़े वाहनों को शेखपुरा-सरमेरा मार्ग से निकालने की योजना बनाई गई थी, लेकिन ट्रक मालिकों के विरोध के बाद अब जिला प्रशासन नया विकल्प तलाश रहा है. फिलहाल रात 10 बजे के बाद शहर की सड़क से पुल पार करने योग्य भारी वाहनों को निकालने पर विचार-विमर्श चल रहा है.नो एंट्री के बाद बदल गया भारी वाहनाें का रूट
बाईपास और मलिया पुल पर नो एंट्री लागू होने के बाद ट्रकों और बड़े वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से भेजने की योजना बनाई गई थी. प्रशासन चाहता था कि भारी वाहन हाथीदह-सरमेरा-शेखपुरा होते हुए लखीसराय पहुंचें, लेकिन स्थानीय ट्रांसपोर्टरों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया.ट्रक मालिकों का कहना है कि लंबा रूट अपनाने से समय अधिक लगेगा और डीजल खर्च भी बढ़ेगा. इससे ट्रांसपोर्ट चार्ज बढ़ेगा और अंततः महंगाई का असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा.
रेलवे ओवरब्रिज बना सबसे बड़ी परेशानी
लखीसराय शहर के बीच स्थित रेलवे ओवरब्रिज भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है. पुल की ऊंचाई सड़क से करीब साढ़े तीन मीटर ही है, जिसके कारण बड़े टैंकर और ऊंचे भारी वाहन वहां से गुजर नहीं सकते.प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार बाईपास पुल की मरम्मत में करीब एक साल का समय लग सकता है. ऐसे में अगले कई महीनों तक भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक ट्रैफिक व्यवस्था लागू रहेगी.रात्रि ट्रैफिक प्लान पर प्रशासन का मंथन
प्रशासन अब ऐसे भारी वाहनों को, जो रेलवे पुल के नीचे से गुजर सकते हैं, रात 10 बजे के बाद शहर में प्रवेश देने पर विचार कर रहा है. इससे दिन के समय जाम की समस्या कम होगी और ट्रैफिक व्यवस्था भी नियंत्रित रहेगी.एसडीओ ने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी से चर्चा कर अंतिम आदेश लिया जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि जो भारी वाहन रेलवे पुल पार नहीं कर सकते, उन्हें शहर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा.उन्होंने यह भी बताया कि गढ़ी बिशनपुर पुल और विद्यापीठ चौक पर रात में जाम की स्थिति बनने पर पहले भी पुलिस की निगरानी में भारी वाहनों को शहर के रास्ते निकाला जाता रहा है.
