सूर्यगढ़ा : बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने वाले सूर्यगढ़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भवन की कमी के बीच नई चुनौती सामने आ गयी है. अस्पताल परिसर में मौजूद जर्जर और परित्यक्त भवनों को तोड़ने का विभागीय आदेश मिल चुका है. ऐसे में पहले से ही भवन की कमी से जूझ रहे 30 बेड वाले अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को लेकर चिंता बढ़ गयी है.
अस्पताल परिसर में करीब आधा दर्जन भवन परित्यक्त हैं, जिनमें कई काफी पुराने और जर्जर हो चुके हैं. विभाग के आदेश के बाद इन भवनों को हटाया जाना है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन भवनों को तोड़ने के साथ खाली होने वाली जमीन पर नये अस्पताल भवनों का निर्माण कराया जाना चाहिए.
प्रीफेब्रिकेटेड भवन बना, फिर भी पूरा इस्तेमाल नहीं
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए हाल में प्रीफेब्रिकेटेड अस्पताल भवन का निर्माण कर उसे विभाग को हस्तगत कराया गया था. हालांकि लंबे समय बाद भी इसका पूरा उपयोग शुरू नहीं हो सका है. वर्तमान में यहां सिर्फ रजिस्ट्रेशन काउंटर और आंखों की जांच की व्यवस्था संचालित हो रही है.
वहीं दवा वितरण काउंटर और ओपीडी सेवा अब भी पुराने भवनों में चल रही है. इससे अस्पताल की उपलब्ध जगह का बेहतर उपयोग नहीं हो पा रहा है.
4 हजार संस्थागत प्रसव, 30 बेड पड़ रहे कम
सूर्यगढ़ा सीएचसी में हर साल करीब चार हजार संस्थागत प्रसव होते हैं. इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. मरीजों की अधिक संख्या के कारण कई बार 30 बेड की क्षमता कम पड़ जाती है.
बंध्याकरण सहित बड़े स्वास्थ्य शिविरों के दौरान मरीजों की संख्या और बढ़ जाती है. ऐसे समय में कई मरीजों को बेड उपलब्ध कराने में परेशानी होती है.
अस्पताल के विस्तार की जरूरत
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि जर्जर और परित्यक्त भवनों को तोड़ने का विभागीय आदेश प्राप्त हो चुका है. भवन की कमी के कारण अस्पताल के कई कार्यालय और स्वास्थ्य संबंधी कार्य अब भी पुराने भवनों में संचालित किये जा रहे हैं.
वार्ड पार्षद अमृत भाई पटेल, रौशन कुमार झा उर्फ सुग्गा झा आदि ने अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाने और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की है. उनका कहना है कि जर्जर भवनों को हटाने के बाद उसी जगह आधुनिक अस्पताल भवन का निर्माण कराया जाना चाहिए.
खाली जमीन का हो बेहतर इस्तेमाल
अस्पताल परिसर में पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने की बात स्थानीय लोगों ने कही है. उनका सुझाव है कि परित्यक्त भवनों को हटाकर खाली होने वाली जमीन पर नये वार्ड, मरीजों के लिए बेड और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े भवन बनाये जाएं.
इससे सूर्यगढ़ा के साथ आसपास के क्षेत्रों से आने वाले हजारों मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकती है. जर्जर भवन हटाने का आदेश मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि खाली होने वाली जमीन का इस्तेमाल सिर्फ परिसर खाली करने में होगा या अस्पताल के विस्तार के लिए नये भवन भी बनेंगे.
