लखीसराय से राजेश कुमार की रिपोर्ट:
Constable Exam Negligence: सिपाही भर्ती परीक्षा जैसी अति संवेदनशील परीक्षा में ड्यूटी से छूट मांगने वाले दो अधिकारियों पर जिलाधिकारी का डंडा चल गया है. एक अधिकारी ने पत्नी के इलाज का हवाला दिया तो दूसरे ने बीमारी का कारण बताया, लेकिन दोनों के आवेदन में कई खामियां पाई गईं. निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने और सीधे डीएम को आवेदन सौंपने पर प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना है. अब दोनों अधिकारियों से दो दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है, नहीं तो कार्रवाई तय मानी जा रही है.
पत्नी के इलाज का हवाला, लेकिन नहीं दिया मेडिकल प्रमाण
पहला मामला पिपरिया के प्रखंड कृषि पदाधिकारी विजय राज से जुड़ा है. उन्हें 14 और 17 जून 2026 को आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा में स्टैटिक दंडाधिकारी-सह-प्रेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उन्होंने पत्नी के इलाज का हवाला देते हुए परीक्षा ड्यूटी से मुक्त करने का अनुरोध किया था. हालांकि आवेदन के साथ कोई मेडिकल दस्तावेज संलग्न नहीं किया गया और न ही इसे नियंत्री पदाधिकारी की अनुशंसा के साथ भेजा गया.
पटना का मेडिकल पुर्जा, बड़हिया में पदस्थापन
दूसरा मामला बड़हिया के प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी उपेंद्र कुमार का है. उन्होंने लू और बुखार से पीड़ित होने का हवाला देते हुए परीक्षा ड्यूटी से मुक्त करने की मांग की थी. लेकिन आवेदन के साथ जो मेडिकल पुर्जा लगाया गया, वह पटना जिले का था. इसके अलावा उनका आवेदन भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे जिलाधिकारी को सौंपा गया.
डीएम ने माना अनुशासनहीनता का मामला
जिलाधिकारी ने दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि परीक्षा जैसे अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण सरकारी कार्य में इस प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं है. आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि संयुक्त आदेश जारी होने के बाद भी निर्धारित प्रक्रिया को नजरअंदाज कर सीधे आवेदन देना घोर अनुशासनहीनता और मनमाने रवैये को दर्शाता है.
दो दिनों के भीतर देना होगा जवाब
जिला प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित विभागीय अधिकारियों के माध्यम से दो दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें. उनसे यह भी पूछा गया है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही बरतने के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए.
प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप
डीएम की इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन और सरकारी विभागों में चर्चा का माहौल है. अधिकारियों के बीच यह संदेश गया है कि संवेदनशील परीक्षाओं और सरकारी दायित्वों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. प्रशासन की इस सख्ती को परीक्षा संचालन में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
