लखीसराय में अब रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद को बढ़ावा, किसानों के लिए शिविर शुरू
गांव-गांव जाकर शिविर लगायेगी और किसानों को जैविक खेती के फायदे बतायेगी. साथ ही जैविक खाद बनाने की विधि और मोटे अनाज के उत्पादन को लेकर भी जानकारी दी जायेगी.
लखीसराय. भारत सरकार के निर्देश के बाद जिले में रासायनिक खाद के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से कम कर जैविक खाद को बढ़ावा दिया जा रहा है. डीएओ कुंदन कुमार ने बताया कि सभी प्रखंडों में किसान शिविर लगाकर किसानों को रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है.
हर गांव में पहुंचेंगे कृषि कर्मी
कुंदन कुमार ने कहा कि इसके लिए सभी एटीएम (कृषि तकनीकी प्रबंधक) एवं बीटीएम (प्रखंड तकनीकी प्रबंधक) को टास्क सौंपा गया है. ये टीमें गांव-गांव जाकर शिविर लगायेगी और किसानों को जैविक खेती के फायदे बतायेगी. साथ ही जैविक खाद बनाने की विधि और मोटे अनाज के उत्पादन को लेकर भी जानकारी दी जायेगी.
खाद संकट बना वजह
दरअसल, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर उर्वरक की किल्लत बढ़ी है. होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल उर्वरक व्यापार का करीब 33 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है. यूरिया बनाने वाली गैस महंगी होने से यूरिया उत्पादन घटा है, जिससे बाजार में खाद की उपलब्धता कम हुई है. इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने खाद का उपयोग घटाकर जैविक विकल्पों पर जोर देने का लक्ष्य रखा है.
फायदे और चुनौतियां दोनों
रासायनिक खाद से फसल की पैदावार अधिक होती है, जिससे अनाज की कमी नहीं होती, लेकिन लंबे समय में इसका असर मिट्टी की सेहत और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है. वहीं जैविक खाद से शुरुआती दौर में उत्पादन कुछ कम हो सकता है, पर इससे उगाई गयी सब्जी, अनाज और फल स्वाद में बेहतर होते हैं और सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. बाजार में जैविक उत्पादों की कीमत भी अधिक मिलती है. जिला प्रशासन मोटे अनाज जैसे मडुआ, ज्वार, बाजरा की जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रहा है. कई किसान पहले से जैविक तरीके से मोटा अनाज उगा रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.
क्या बोले अधिकारी
जिला कृषि पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा, “भविष्य में रासायनिक खाद की किल्लत और बढ़ सकती है. जैविक खाद से उत्पादित फसल लोगों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. केंद्र सरकार की नीति के अनुसार हम किसानों को जागरूक कर रहे हैं. किसानों को मोटे अनाज की खेती भी करनी चाहिए, ताकि वे स्वस्थ रहें और आमदनी भी बढ़े.” प्रशासन का दावा है कि आने वाले महीनों में हर पंचायत तक जागरूकता अभियान पहुंचाया जायेगा, ताकि लखीसराय जिला जैविक खेती में मॉडल बन सके.
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