सावन की तीसरी सोमवारी के पावन अवसर पर लखीसराय जिले के बड़हिया में आस्था और भक्ति का अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा. रविवार देर रात से ही विभिन्न पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों से हजारों की संख्या में कांवरिये और शिवभक्त बड़हिया रेलवे स्टेशन पहुंचने लगे. स्टेशन परिसर से लेकर मुख्य मार्गों तक गूंजते 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से समूचा इलाका पूरी तरह भक्तिमय हो गया.
कॉलेज घाट से गंगाजल लेकर अशोकधाम रवाना हुए श्रद्धालु
रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद श्रद्धालुओं का विशाल जत्था सीधे गंगा तट स्थित बड़हिया कॉलेज घाट पहुंचा. वहां ब्रह्ममुहूर्त में पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर कांवरियों ने विधिवत संकल्प के साथ पात्रों में गंगाजल भरा. इसके बाद वे नंगे पांव पैदल यात्रा करते हुए इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर (अशोकधाम) में जलाभिषेक के लिए रवाना हो गए. देर रात से शुरू हुआ यह सिलसिला अहले सुबह तक अनवरत चलता रहा और कॉलेज घाट से अशोकधाम जाने वाले पूरे मार्ग पर कांवरियों की लंबी कतारें लगी रहीं.
नगर परिषद ने संभाली रोशनी और सफाई की कमान
हर वर्ष सावन के दौरान जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए बड़हिया नगर परिषद ने कॉलेज घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रकाश के पुख्ता इंतजाम किए थे. रात के अंधेरे में स्नान और जल भरने में किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए घाट परिसर में पर्याप्त रोशनी की गई थी. इसके साथ ही घाट की सतत निगरानी और स्वच्छता बनाए रखने के लिए दो नगर कर्मियों को भी विशेष रूप से तैनात किया गया था.
सुरक्षा के इंतजाम नदारद, प्रशासनिक तैयारी पर उठे सवाल
एक तरफ जहां श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ा था, वहीं दूसरी ओर घाट पर सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था पूरी तरह नदारद दिखी. देर रात तक कॉलेज घाट और आसपास के संवेदनशील नदी तटों पर न तो एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की कोई टीम मौजूद थी और न ही भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी. सबसे चिंताजनक बात यह रही कि किसी भी आकस्मिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए मौके पर न तो कोई एंबुलेंस खड़ी थी और न ही प्राथमिक उपचार के लिए मेडिकल टीम उपलब्ध कराई गई थी.
आपात स्थिति से निपटने की ठोस रणनीति की दरकार
हर साल सावन के महीने में बड़हिया कॉलेज घाट से हजारों की संख्या में श्रद्धालु जल भरकर अशोकधाम जाते हैं. ऐसे में सुरक्षा और चिकित्सीय व्यवस्था का न होना किसी बड़े खतरे को दावत देने जैसा है. स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि यदि अचानक कोई अप्रिय घटना घटती है या भगदड़ अथवा डूबने जैसी आपात स्थिति बनती है, तो तत्काल राहत और बचाव कार्य कैसे होगा. कुल मिलाकर आस्था के इस विशाल समागम के बीच प्रशासनिक लापरवाही ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है.
