गंगा नदी के विकराल रूप ने लखीसराय जिले के तटीय और दियारा इलाकों में गंभीर चिंता पैदा कर दी है. बाढ़ का गंभीर खतरा देखते हुए, जिला प्रशासन बड़हिया, लखीसराय सदर, पिपरिया और सूर्यगढ़ा अंचलों में युद्धस्तर पर सक्रिय हो गया है.
इन चारों प्रखंडों की लगभग 1,49,516 की विशाल आबादी संभावित बाढ़ के सीधे दायरे में है. राहत की बात यह है कि केंद्रीय जल आयोग के अनुसार हाथीदह में गंगा का जलस्तर घटने की ओर अग्रसर है, लेकिन वर्तमान में यह अब भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है.
खतरे के मद्देनजर प्रशासन ने किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरतते हुए संवेदनशील तटबंधों पर दिन-रात बालू की बोरियां (सैंड बैग्स) डालकर मजबूती का कार्य जारी रखा है.
आपदा से बचाव: 46 नावों और NDRF-SDRF की विशेष मोटरबोटें तैनात
जलमग्न और दियारा क्षेत्रों से लोगों के सुरक्षित आवागमन तथा आपातकालीन रेस्क्यू के लिए प्रशासन ने कुल 46 नावों का बेड़ा मैदान में उतारा है. इनमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 6 अत्याधुनिक स्पीड मोटरबोट शामिल हैं, जो त्वरित राहत पहुंचाने में लगी हैं.
विस्थापित परिवारों के लिए 2 राहत आश्रय स्थल और 6 सामुदायिक रसोई केंद्र निरंतर काम कर रहे हैं. इन रसोइयों के जरिए अब तक 4,681 बाढ़ पीड़ितों को भूखे पेट को सुकून देने वाला गर्म भोजन कराया जा चुका है. उदाहरण के लिए, एक स्थानीय निवासी, सुरेश मांझी, ने बताया कि कैसे इन रसोइयों से मिला गर्म खाना उनके परिवार के लिए जीवनदान साबित हुआ, क्योंकि उनके घर का सारा राशन पानी में बह गया था. इसके अतिरिक्त 1,650 सूखे राशन के फूड पैकेट और 14,500 पॉलीथिन शीट्स का वितरण प्रभावितों के बीच किया गया है, जबकि आपात स्थितियों के लिए 1,000 फूड पैकेट्स का सुरक्षित बफर स्टॉक रखा गया है.
स्वास्थ्य सुरक्षा: 216 गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग, 122 दवाएं उपलब्ध
संक्रमण और मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए जिले में 27 विशेष चिकित्सा शिविर क्रियाशील किए गए हैं, जहां अब तक 11,939 मरीजों का प्राथमिक उपचार किया गया है.
पिपरिया और बड़हिया के सुदूरवर्ती गांवों में मोबाइल मेडिकल टीमें नावों के सहारे घर-घर जाकर दवाएं बांट रही हैं. सभी केंद्रों पर ओआरएस, एंटी-वेनम, एंटी-रेबीज सहित 122 प्रकार की जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं.
संवेदनशीलता का परिचय देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों की 216 गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनकी विशेष ट्रैकिंग शुरू की है. इनमें से 77 ऐसी महिलाएं हैं जिनका प्रसव अगले दो महीनों में होना तय है, ताकि समय रहते उन्हें सुरक्षित प्रसव केंद्रों तक पहुंचाया जा सके.
पशुपालकों को राहत: 419 क्विंटल चारा बंटा, 4 सचल टीमें कर रहीं मवेशियों का इलाज
दियारा क्षेत्र के पशुपालकों और मवेशियों की रक्षा के लिए पशुपालन विभाग ने 419 क्विंटल सूखा पशुचारा उपलब्ध कराया है.
मवेशियों में गलघोंटू और मौसमी संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए 4 सचल (मोबाइल) पशु चिकित्सा दल लगातार फील्ड में गश्त कर रहे हैं, जिन्होंने अब तक 175 बीमार पशुओं का मौके पर उपचार किया है.
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कैंप करें. राहत कार्यों में किसी भी लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई होगी.
