प्रखंड के अरमा गांव में मैट्रिक पास महेश्वर गुरु-शिष्य परंपरा को कायम किये हुए हैं
कइयों ने हासिल किये ऊंचे पद
मेदनीचौकी : सूर्यगढ़ा प्रखंड के अरमा गांव में मैट्रिक पास महेश्वर पासवान (56 वर्ष) गुरु-शिष्य परंपरा को कायम रखते हुए समाज के सबसे कमजोर तबके के बच्चों को लगातार 40 वर्षों से मुफत पढ़ा रहे हैं. 20 जुलाई 1958 को जन्मे महेश्वर पासवान ने 1974 में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नरोत्तमपुर कजरा से मैट्रिक पास किया. गरीबी ने उन्हें आगे पढ़ने नहीं दिया, अब उन्होंने गरीब बच्चों को पढ़ाने का संकल्प ले रखा है.
उनके पढ़ाने का समय बच्चों के स्कूल जाने से पूर्व व स्कूल से लौटने के बाद है. जाड़ा हो या गरमी या फिर बरसात का मौसम कोई अंतर नहीं पड़ता है. वे रोजाना सुबह चार बजे गांव में घर-घर जाकर दस्तक दे आते हैं. ब्रह्म मुहूर्त में जगा कर बच्चे को पढ़ने के लिए उत्साहित करते हैं. सुबह 6:15 से 8:15 बजे तक पुन: तीन बजे अपराह्न से पांच बजे वे बच्चों को मनोयोगपूर्वक पढ़ाते हैं.
पहले वे अपने छोटे से दरवाजे पर बच्चों को पढ़ाते थे, फिर उन्होंने स्थानीय एक स्कूल के बरामदे पर पढ़ाना शुरू किया. इन दिनों वे सामुदायिक भवन में 100 से अधिक बच्चों को शिक्षा की रोशनी दे रहे हैं. बच्चे अपने साथ स्लेट, पेंसिल लाते हैं, उन्हें अक्षर-ज्ञान देना श्री पासवान के जीवन का व्रत है. मिडिल पास पत्नी शोभा देवी के सहयोग से वे इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं. पूर्व मुखिया अनिता देवी बोली वें बच्चों को पढ़ाते ही नहीं उन्हें बनाते हैं, गढ़ते हैं. इसके अलावा सामाजिक गतिविधियों में भी उनकी गहरी रुचि रही है. इसके लिए उन्हें मानवाधिकार जागरूकता संगठन द्वारा अनुशंसा पत्र दिया गया. इसके अलावा कई संगठनों द्वारा उन्हें समाजसेवा के लिए प्रशस्ति पत्र दिया गया. इसके अलावा पर्यावरण स्वच्छ भारत अभियान, साक्षर भारत मिशन, मानवाधिकार संरक्षण से जुड़ कर ये जनहित में लगे रहे हैं.
