वार्ड 33 के महादलित टोले में नल-जल योजना फेल, सामुदायिक शौचालय पर भी लटका ताला
लखीसराय. मई व जून की तपती दुपहरिया के आगमन से पूर्व ही शहर में पेयजल के लिए हाहाकार मच गया है. शहर के अंतिम छोर पर स्थित वार्ड संख्या 33 के लाली पहाड़ी महादलित टोला में पानी की भारी किल्लत है. यहां ”हर घर नल का जल” योजना के तहत पाइप तो लगाए गए हैं, लेकिन नलों से एक बूंद पानी भी नहीं टपक रहा है.पानी के लिए संघर्ष की पराकाष्ठा
ग्रामीण पानी टावर के पास पहुंचकर घंटों बाल्टी व बर्तन लगाकर प्रतीक्षा करते हैं, ताकि धीरे-धीरे जमा होने वाले पानी से घरेलू कार्यों और पेयजल की व्यवस्था हो सके. कई बार घंटों प्रतीक्षा के बाद भी जब पानी नहीं आता, तो महादलित समुदाय के लोग किऊल नदी में जाकर बालू खोदते हैं और वहाँ से निकलने वाले पानी को बर्तनों में भरकर घर लाते हैं.स्वच्छता अभियान पर असर
पानी की कमी को लेकर कई बार नगर परिषद एवं पीएचईडी विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन महीनों तक कोई सुनवाई नहीं होती. स्थिति यह है कि महादलित टोले में निर्मित सामुदायिक शौचालय पानी के अभाव में बंद पड़ा है. विवश होकर लोग शौच के लिए किऊल नदी का सहारा लेते हैं, जिससे स्वच्छता अभियान को भी धक्का लग रहा है.अन्य वार्डों का भी बुरा हाल
यही स्थिति पुरानी बाजार के वार्ड संख्या आठ स्थित कुम्हार टोली की है. लगभग 1,200 की आबादी वाला यह मुहल्ला पूरी तरह एक चापाकल पर निर्भर है. स्थानीय लोगों के अनुसार महीनों से मोटर खराब पड़ी है, लेकिन सूचना देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. यहां के अति पिछड़े एवं दलित समुदाय के लोगों ने सुधार के लिए कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) को आवेदन दिया है.अधिकारी व प्रतिनिधि का पक्ष
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“पानी की कमी और महादलित टोले में आपूर्ति बाधित होने की निरंतर शिकायत नगर परिषद से की जाती है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होती. “—
बबलू कुमार,
पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड संख्या 33—“गर्मी की गंभीरता को देखते हुए वार्ड संख्या 33 में 10 हजार लीटर क्षमता का पानी टैंकर भेजा जा रहा है. वार्ड संख्या 8 से भी मोटर खराब होने का आवेदन प्राप्त हुआ है, जिसे संज्ञान में लेते हुए मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है. “
—प्रभात रंजन,
कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद—
