परेशानी . 40 डिग्री सेल्सियस के पार तापमान, 18 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही है हवा
इस साल अप्रैल माह में ही सूरज आग उगलने लगा है. तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार होने की वजह से लोगों को अप्रैल माह में ही जून माह की गरमी का एहसास हो रहा है. यह पहली बार हुआ कि अप्रैल माह का तापमान 40 डिग्री के आसपास या उसके पार रहा है. बुधवार को अधिकतम पारा में एक डिग्री की मामूली गिरावट हुई. हवा भी 18 किलोमीटर की रफ्तार से चली.
लखीसराय : जिले में बदन झुलसाती धूप व हलक सुखाती गरमी का असर बुधवार को भी बना रहा. गरमी के कारण दिन चढ़ने के बाद लोग धर से बाहर निकलने से परहेज करते रहे. बच्चों को स्कूल से लौटने में परेशानी हो रही थी. मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक गुरुवार को अधिकतम पारा 43 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है.
भीषण गरमी से जूझ रहे स्कूली बच्चे. तापमान में अत्यधिक वृद्धि ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. चढ़ते पारे से सबसे ज्यादा बच्चों को परेशानी हो रही है. सुबह की कक्षा संचालन के बावजूद बच्चे भीषण गरमी से जूझ रहे हैं. चिकित्सक भी ऐसी गरमी में स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने की सलाह दे रहे. दरअसल ऐसे मौसम में लू व दस्त का खतरा बढ़ जाता है. अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में कक्षा संचालन सुबह छह बजे से 10 बजे तक ही होनी चाहिए.
बच्चों की सेहत को ले अभिभावक चिंतित. अप्रैल माह में ही गरमी के रौद्र रूप ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. सूर्यगढ़ा बाजार के अभय गुप्ता के मुताबिक स्कूल से लाने वक्त बच्चों के उतरे हुए चेहरे देखकर चिंता होती है. वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते होंगे. कक्षा का संचालन सुबह 10 बजे तक ही होनी चाहिए. काशीचक अभयपुर के आशीष कुमार के मुताबिक ऐसी गरमी में बच्चों की तबियत बिगड़ सकती है.
बच्चे कई किलोमीटर दूर से बस या अन्य माध्यम से घर वापस लौटते हैं. गरम हवा के झोंके उन्हें बीमार कर सकते हैं. साकेतनगर सूर्यगढ़ा के अजय ठाकुर के मुताबिक स्कूल का समय बदला है लेकिन उसमें थोड़ा और परिवर्तन की जरूरत है. शिक्षक जटाशंकर शर्मा के मुताबिक गरमी की वजह से बच्चों का कक्षा में पढ़ाई में मन नहीं लगता है. विद्यालय में गरमी से राहत का उचित प्रबंध भी नहीं होता.
